ईरान से जुड़े मानवाधिकार प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत के रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। भारत द्वारा इस प्रस्ताव का विरोध किए जाने पर ईरान ने खुले तौर पर इसकी सराहना की है। तेहरान का कहना है कि भारत का यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ईरान में मानवाधिकार स्थिति को लेकर वैश्विक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 39वें विशेष सत्र में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें वहां मानवाधिकार स्थिति पर निगरानी बढ़ाने की मांग की गई थी। भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और इसे चुनिंदा तथा राजनीतिक रूप से प्रेरित पहल बताया। मतदान में 25 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में, सात देशों ने विरोध में वोट दिया, जबकि 14 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव भले ही पारित हो गया, लेकिन भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा, जिन्होंने इसके खिलाफ खुलकर रुख अपनाया।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भारत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि यूएनएचआरसी में भारत का रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति उसकी सैद्धांतिक प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला भारत-ईरान संबंधों की गहराई और आपसी भरोसे को और मजबूत करता है।
इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही भी भारत-ईरान संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के संबंध इस्लाम के उदय से भी पहले के हैं। ईरान में लंबे समय तक भारतीय दर्शन, गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र का अध्ययन होता रहा है। उन्होंने चाबहार परियोजना में भारत के साथ सहयोग की उम्मीद भी जताई थी, जिसे दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों के लिए बेहद अहम माना जाता है।
ईरान में हालिया सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार कार्रवाई में 3,117 लोगों की मौत हुई है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने इससे कहीं अधिक संख्या होने का दावा किया है। इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी आलोचना हुई है और अमेरिका समेत कई देशों ने ईरान सरकार की निंदा की है।
भारत का कहना है कि मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दबाव या चुनिंदा प्रस्तावों के बजाय संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। भारत का यह रुख उसकी पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जिसमें संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और बहुपक्षवाद को प्राथमिकता दी जाती है। इसी संतुलित और स्वतंत्र कूटनीतिक लाइन के लिए ईरान ने भारत की सराहना की है।