भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने विजय दिवस और 1971 के युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में आयोजित मोटरसाइकिल अभियान विजय रैली 2025 राइड फॉर वेलर का रविवार को सफल समापन किया। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान सेना के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जाता है। यह रैली 25 नवंबर 2025 को शुरू हुई थी और 1 दिसंबर को गुवाहाटी से इसका आधिकारिक शुभारंभ हुआ। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से राइडर्स इस यात्रा का हिस्सा बने। रैली ने 1350 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की और दीमापुर, तेजपुर, शिलांग, गुवाहाटी, बिन्नागुड़ी, सुकना, हिली, सिलीगुड़ी, मालदा, पानागढ़ और नबाग्राम से होकर गुजरते हुए अंततः विजय दुर्ग स्थित विजय स्मारक पर समाप्त हुई। मार्ग में राइडर्स ने 1971 के शहीदों को नमन करते हुए अल्बर्ट एक्का, करीमगंज, किलपाड़ा, सुकना, बोगरा और हिली वार मेमोरियल्स पर पुष्पांजलि अर्पित की। रैली के अंतिम चरण का नेतृत्व ईस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी ने किया, जिन्होंने कोलकाता में आयोजित इस प्रतीकात्मक राइड में हिस्सा लिया। 1971 की विजय के सम्मान में 71 सैन्य राइडर्स और 71 सिविल राइडर्स ने इस यात्रा में भाग लिया, जो उस युद्ध में दिखाए गए साहस और बलिदान का प्रतीक है। कोलकाता में निकाली गई 25 किलोमीटर की समापन राइड के दौरान विजय स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। रास्ते में अनेक उत्साही बाइकर्स भी रैली से जुड़ते गए, जिससे वातावरण देशभक्ति से भर गया। विजय रैली 2025 का यह समापन विजय दिवस समारोह (14-16 दिसंबर) की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है, जिसके तहत भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और बलिदान को याद किया जाएगा।

