नई दिल्ली, 31 मार्च 2026
कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को ‘असांविधानिक और कठोर’ बताते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस विधेयक को संसद में “जबरदस्ती” पारित कराने की योजना बना रही है। पार्टी ने अपने सभी सांसदों को चुनावी राज्यों से तत्काल दिल्ली पहुंचने और बुधवार को सदन में उपस्थित रहने के लिए ‘व्हिप’ जैसा निर्देश जारी किया है।
विवाद की मुख्य वजहें और कांग्रेस के आरोप: केसी वेणुगोपाल ने इस प्रस्तावित कानून को लेकर कई गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं:
- अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का दावा: कांग्रेस का आरोप है कि यह विधेयक विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर केरल के ईसाई संस्थानों और सामाजिक सेवा में लगे एनजीओ को नियंत्रित करने और डराने की एक सोची-समझी साजिश है।
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल: वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार यह विधेयक तब ला रही है जब कई सांसद विधानसभा चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।
- संसद के बाहर प्रदर्शन: पार्टी ने घोषणा की है कि बुधवार सुबह 10:30 बजे संसद परिसर के बाहर इस विधेयक के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा।
सरकार का पक्ष: 25 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक पर सरकार का रुख स्पष्ट है। केंद्र का तर्क है कि:
- विदेशी धन के माध्यम से होने वाले जबरन धर्म परिवर्तन में लिप्त व्यक्तियों और संस्थाओं पर नकेल कसना जरूरी है।
- गड़बड़ी करने वाले एनजीओ की संपत्ति जब्त करने या बेचने का प्रावधान पारदर्शिता लाने के लिए है।
- सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी अंशदान का उपयोग केवल निर्धारित सामाजिक कार्यों के लिए हो, न कि राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए।
क्या है FCRA संशोधन? इस विधेयक में एनजीओ और स्वैच्छिक संगठनों पर नियंत्रण सख्त करने के प्रावधान हैं। इसके तहत सरकार के पास उन एनजीओ की संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान का अधिकार होगा जो नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं।
कांग्रेस ने इसे “शांतिपूर्ण समाज को बांटने और तनाव पैदा करने वाला” कदम बताया है। अब बुधवार को संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर भारी हंगामे के आसार हैं।

