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महाराष्ट्र सियासी घमासान: सुप्रीम कोर्ट ने बागी गुट से पूछा- क्यों नहीं गए हाईकोर्ट ? साथ ही डिप्टी स्पीकर को हलफनामा दाखिल करने को कहा

महाराष्ट्र का सियासी बोहरान गहराता ही जा रहा है. आज इस मामले शिवसेना के बागी गुट बड़ा सहारा मिला है. बागी गुट की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता नोटिस का जवाब देने के लिए दिया 14 दिन का वक्त दिया है. सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर पांच दिन में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में 11 जुलाई को सुनवाई करेगा.

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इसके अलावा कोर्ट ने सभी विधायकों को सुरक्षा मुहैया कराने और यथा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैसले तक कोई फ्लोर टेस्ट नहीं किया जाएगा.

महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच शिंदे गुट की अर्जियों पर आज कोर्ट में सुनवाई हुई. दो जजों की बेंच ने सुनवाई की. शिंदे गुट की ओर से नीरज किशन कौल ने बहस किया. जस्टिस सूर्यकांत ने शिंदे गुट से पूछा, आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए. कौल ने कहा कि हमारे पास 39 विधायक है. सरकार अल्पमत में है. हमे धमकी दी जा रही है . हमारी संपत्ति जलाई जा रही है . बॉम्बे कोर्ट में सुनवाई के लिए माहौल नहीं है. हमें नोटिस का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से 39 असंतुष्ट विधायकों और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। इसपर शीर्ष अदालत में राज्य सरकार के वकील द्वारा कहा गया कि 39 असंतुष्टों के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी शिवसेना खेमे द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा।

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सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर के कार्यालय से सभी रिकॉर्ड मांगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बागी गुट से पूछा था कि उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया। शिंदे खेमे का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील नीरज के कौल ने जवाब दिया, ‘हमें और हमारे परिवारों को मिल रही धमकियों के कारण मुंबई में मामले की सुनवाई आगे बढ़े यह हमारे लिए सही नहीं होगा।’

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