देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और सीमाओं के पार से संचालित हो रहे साइबर अपराधों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है। सीबीआई और आरबीआई (RBI) के संयुक्त प्रयासों से विकसित ‘म्यूल हंटर’ (Mule Hunter) ऐप अब वित्तीय धोखाधड़ी की चेन को तोड़ने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
‘म्यूल खातों’ पर बड़ी कार्रवाई: 70% संदिग्धों ने नहीं किया दावा
सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद ने जानकारी दी कि ‘म्यूल हंटर’ के माध्यम से ब्लॉक किए गए संदिग्ध खातों में से 70 प्रतिशत खातों को अनब्लॉक कराने के लिए कोई सामने नहीं आया। यह स्पष्ट संकेत है कि ये खाते केवल धोखाधड़ी के पैसों को घुमाने (Money Laundering) के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
- क्या है म्यूल खाता? अपराधी छोटे लालच देकर आम लोगों के नाम पर खाते खुलवाते हैं और एआई (AI) की मदद से कुछ ही सेकंड में पैसा इन खातों के जरिए पार कर देते हैं।
टारगेट पर पहली और तीसरी कड़ी
सीबीआई अब ‘फ्रॉड चेन’ की पहली और तीसरी कड़ी पर वार कर रही है।
- पहली कड़ी: वह खाता जिसमें फ्रॉड का पैसा सबसे पहले जमा हुआ।
- तीसरी कड़ी: वह वित्तीय संस्थान या माध्यम जहाँ पैसा अंतिम रूप से ट्रांसफर हुआ। चूंकि मुख्य अपराधी (दूसरी कड़ी) कंबोडिया, म्यांमार और मलेशिया जैसे देशों में छिपे हैं, इसलिए जांच एजेंसी की प्राथमिकता अपराधी तक पहुँचने से पहले पीड़ित का पैसा सुरक्षित करना है।
‘गोल्डन आवर’ का महत्व: 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत करें कॉल
गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सम्मेलन में ‘गोल्डन आवर’ यानी अपराध के पहले एक घंटे की महत्ता पर जोर दिया।
- रिकवरी की संभावना: पहले घंटे में शिकायत होने पर कम से कम 40% मामलों में पैसा वापस मिलने की संभावना रहती है।
- बड़ी सफलता: अब तक साइबर अपराध की शिकायतों के माध्यम से 8,189 करोड़ रुपये की राशि बचाई जा चुकी है।
- गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि 1930 हेल्पलाइन पर कॉल तुरंत नहीं उठाया गया, तो सिस्टम की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। उन्होंने बैंकों को ‘म्यूल हंटर’ सॉफ्टवेयर तुरंत अपनाने का निर्देश दिया है।
बैंकिंग सेक्टर में विस्तार
शुरुआत में यह ऐप चार प्रमुख बैंकों को मुहैया कराया गया है, जिसके सकारात्मक नतीजे मिले हैं। जल्द ही इसे सरकारी, निजी और सहकारी समेत करीब डेढ़ दर्जन बैंकों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार की जा रही है।
सावधान रहें: किसी अज्ञात कंपनी या व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में पैसा जमा करवाकर उसे आगे ट्रांसफर न करें। यह आपको ‘म्यूल अकाउंट’ का हिस्सा बना सकता है, जिससे आप कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं।

