नई दिल्ली, 26 मार्च 2026
भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। वैश्विक बीएपीएस (BAPS) संस्था के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज द्वारा 108 फीट ऊंची ‘तपोमूर्ति’ श्री नीलकंठ वर्णी (भगवान स्वामीनारायण) की भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। पंचधातु से निर्मित यह प्रतिमा विश्व की पहली ऐसी मूर्ति है जिसमें भगवान को एक पैर पर खड़े होकर कठिन तपस्या करते हुए दर्शाया गया है। यह स्थान अब न केवल भक्ति का केंद्र बनेगा, बल्कि भगवान स्वामीनारायण द्वारा मात्र 11 वर्ष की आयु में शुरू की गई 12,000 किलोमीटर की साहसिक और आध्यात्मिक भारत यात्रा की स्मृति को भी जीवंत करेगा।
इस भव्य आयोजन का औपचारिक आगाज 25 मार्च को ‘विश्व शांति महायज्ञ’ के साथ हुआ, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप सहित दुनिया भर से आए 300 से अधिक संतों ने हिस्सा लिया। यज्ञ के दौरान महंत स्वामी महाराज ने वैश्विक शांति और सद्भाव के प्रतीक के रूप में सफेद कबूतर उड़ाए और मानवता के कल्याण की प्रार्थना की। आज सुबह 6 बजे से मुख्य प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान प्रारंभ होगा, जिसके बाद इस अद्वितीय प्रतिमा का औपचारिक उद्घाटन कर इसे श्रद्धालुओं के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।

