महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा के चुनावों को लेकर सियासी गोटिया सेट की जाने लगी है। पूरी राजनीतिक चौसर में सभी सियासी दल दांव पेंच आजमाने का खाका भी खींच चुके हैं ताकि जीत सुनिश्चित हो। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की महायुति सरकार ने मध्य प्रदेश की उस योजना को महाराष्ट्र में लॉन्च कर दिया है जिसने मध्य प्रदेश में तमाम सियासी अटकलो और आंकड़ों को ध्वस्त कर एक बार फिर सरकार बनाई थी। दरअसल महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने मध्य प्रदेश की लाडली बहन योजना को बड़ा आधार बनाकर आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसको लॉन्च कर दिया है। अब बड़ा सवाल यही है कि जिस तरीके से मध्य प्रदेश में लाडली बहन योजना गेम चेंजर साबित हुई थी, क्या ठीक उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में भी यह अपना असर दिखाएगी या नहीं। हालांकि दिल्ली आकर उद्धव ठाकरे ने इस योजना को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने बुधवार को INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ मुलाकात में इसका जिक्र कर आगे की रणनीति बनाई है।
जैसे-जैसे विधानसभा के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं महाराष्ट्र की सियासत में रोज नए दांव पेंच देखने को मिल रहे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा के शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लाडली बहन योजना के शुभारंभ की बात कही थी। इस योजना के तहत मध्य प्रदेश की प्रत्येक महिला को हर महीने 1500 रुपए दिए जाने हैं। लेकिन इस योजना को लेकर न सिर्फ सियासत शुरू हुई बल्कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी अब इसको लेकर विपक्षी दल बड़ा प्लान बनाने लगे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली दौरे पर आए शिवसेना उद्धव ठाकरे के मुखिया उद्धव ठाकरे ने इस पूरी योजना पर मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को घेरा है। उद्धव ठाकरे का कहना है कि जिस लाडली बहन योजना के माध्यम से महायुति सरकार 1500 रुपए महिलाओं को देने का वादा कर रही है। वह एक धोखा है। उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि जब इस सरकार के पास कुछ नहीं बचा तो इस तरह से धोखे की बात की जाने लगी है।
महाराष्ट्र की सियासत में इस योजना का असर कितना होगा यह तो चुनाव और उसके परिणाम बताएंगे। लेकिन विपक्ष में जिस तरीके से इस योजना पर हमला बोला है उससे सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की जरूर हो रही है कि मध्य प्रदेश के इस गेम चेंजर प्लान से महाराष्ट्र सरकार अपनी नींव को मजबूत करने की कोशिश में लग गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कहते हैं कि अगर महाराष्ट्र सरकार इस योजना के तहत 1500 रुपए महीने देगी तो उस 15 लाख रुपए का क्या होगा जिसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देने की बात की बात कही थी। उद्धव ठाकरे ने पांच करते हुए कहा कि यह सरकार सिर्फ दिखावे की ही बात कर रही है। अब इस पूरे मामले को लेकर दिल्ली में विपक्षी दलों ने सियासी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने बुधवार को हुई अपनी मुलाकात के दौरान महायुती सरकार की ऐसी योजनाओं के बारे में INDIA गठबंधन से जुड़े नेताओं के साथ चर्चा भी की और अपना पक्ष भी रखा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में लाडली बहन योजना क्या सियासी रूप से सफल होगी या नहीं यह तो चुनाव के नतीजे बताएंगे। लेकिन जिस तरीके से मध्य प्रदेश में इस योजना ने सरकार की वापसी कराई वह बेहद महत्वपूर्ण है और इस प्रयोग को यहां पर आजमाया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि इस योजना ने मध्य प्रदेश में सभी सियासी आकलनों को ध्वस्त करते हुए सत्ता में वापसी का आधार बनाया था। इस आधार और अनुमान की तर्ज पर ही मध्य प्रदेश की योजना को महाराष्ट्र में लॉन्च किया गया है। राजनीतिक विश्लेषक नीरज कांबले कहते हैं कि हाल में हुए लोकसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का जो परिणाम रहा है वह बेहद कमजोर रहा है। ऐसे में महायुति सरकार आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ ऐसी योजनाओं को निश्चित तौर पर शुरू करना चाहती है जिससे कि उसको चुनाव में फायदा हो। लाडली बहना योजना भी उसी तर्ज पर शुरू की गई एक योजना है। नीरज कहते हैं क्योंकि इस योजना से मध्य प्रदेश में सरकार को जबरदस्त सियासी फायदा मिला था। इस सियासी फायदे को महाराष्ट्र की महायुती सरकार अपने राज्य में भी देख रही है।

