नई दिल्ली, 30 मार्च 2026
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता बीजू पटनायक पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मन में बीजू बाबू के प्रति सदैव गहरा सम्मान रहा है और उनके बयान का उद्देश्य पटनायक की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि नेहरू-गांधी परिवार और तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना था। दुबे ने कहा कि उन्होंने केवल ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र किया था और यदि इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए तैयार हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब निशिकांत दुबे ने 27 मार्च को एक बयान में दावा किया था कि 1960 के दशक में चीन के साथ युद्ध के दौरान बीजू पटनायक तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजू जनता दल (BJD) के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया। बीजेडी नेता सस्मित पात्रा ने इसे बीजू पटनायक जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताते हुए दुबे की कड़ी आलोचना की। वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस बयान को ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ करार दिया है।
निशिकांत दुबे ने पलटवार करते हुए कहा कि देश में महापुरुषों को क्षेत्र और जाति की संकीर्ण सीमाओं में बांधने की प्रवृत्ति एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने तर्क दिया कि बीजू पटनायक केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विशेषकर बिहार के लिए भी गर्व का विषय हैं, क्योंकि 1936-37 तक ओडिशा बिहार का ही हिस्सा था। उन्होंने बंगाल के पहले मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय का उदाहरण देते हुए कहा कि महान हस्तियों की पहचान को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल, इस ऐतिहासिक संदर्भ और ‘सीआईए लिंक’ के दावे ने ओडिशा से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है।

