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यूपी: मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष बना गरीबों का संबल, एक साल में 50 हजार लोगों को मिली ₹860 करोड़ की मदद

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लखनऊ, 5 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष’ (CM Discretionary Fund) जरूरतमंदों के लिए एक जीवनरक्षक तंत्र के रूप में उभरा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने इस कोष से 860 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड धनराशि स्वीकृत की है। खास बात यह है कि इस सहायता का लाभ राज्य के 50 हजार से अधिक उन लोगों तक पहुँचा है, जो गंभीर बीमारियों या आकस्मिक संकट से जूझ रहे थे।

1. बिना किसी भेदभाव के ‘सबका साथ’

इस कोष के वितरण की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता रही है:

  • दलगत राजनीति से ऊपर: सहायता राशि की सिफारिश करने वालों में केवल सत्तापक्ष (भाजपा) के ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विधायक और सांसद भी शामिल रहे। सरकार ने जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक संबद्धता देखे बिना केवल पीड़ित की ‘जरूरत’ को आधार बनाया।
  • क्षेत्रीय कवरेज: अयोध्या, अमेठी, बाराबंकी, आजमगढ़, बलिया और फिरोजाबाद जैसे जिलों में कुछ बड़े और गंभीर मामलों के चलते सर्वाधिक धनराशि आवंटित की गई।

2. ‘जहां जरूरत, वहां सहायता’ का सिद्धांत

मुख्यमंत्री कोष ने पारंपरिक कोटा सिस्टम को खत्म कर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है:

  • सहायता का दायरा: इस कोष से न्यूनतम ₹50,000 से लेकर गंभीर मामलों में ₹3 करोड़ तक की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है।
  • त्वरित निर्णय: विशेष रूप से कैंसर, हार्ट सर्जरी और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे चिकित्सा मामलों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और तेज रखा गया है, ताकि इलाज में देरी न हो।

3. सहायता पाने की आसान प्रक्रिया (Guide)

मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो अन्य सरकारी योजनाओं के दायरे में नहीं आ पाते या जिन्हें तत्काल आर्थिक बैकअप की जरूरत है।

किसे मिल सकती है मदद?

  • गंभीर बीमारी से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज।
  • आकस्मिक दुर्घटना या आपदा के शिकार परिवार।
  • विशेष परिस्थितियों में शिक्षा या अन्य आपातकालीन जरूरतों वाले लोग।

आवेदन कैसे करें?

  1. माध्यम: अपने क्षेत्र के विधायक (MLA) या सांसद (MP) के माध्यम से सिफारिशी पत्र के साथ आवेदन करें। इसके अलावा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (जनता दर्शन या डाक द्वारा) भी प्रार्थना पत्र दिया जा सकता है।
  2. जरूरी दस्तावेज: * अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट और इलाज के खर्च का अनुमानित बिल (Estimate)।
    • आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)।
    • आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र।

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