नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2026
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अप्रैल 2018 में हुए देशव्यापी दलित और आदिवासी आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की अपील की है। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि ये युवा अपने संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन आज भी हजारों निर्दोष युवा कानूनी अदालतों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
पत्र के मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक संदर्भ: 2 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हुआ था, जिससे एससी-एसटी कानून कमजोर होने की आशंका थी। राहुल गांधी ने याद दिलाया कि उस हिंसा में 14 दलित युवाओं की जान गई थी।
- युवाओं के भविष्य पर संकट: राहुल ने लिखा कि गिरफ्तार किए गए कई युवा अपने परिवार की पहली पीढ़ी के छात्र हैं। आपराधिक मामलों के कारण उनकी पढ़ाई, सरकारी नौकरी और करियर पर बुरा असर पड़ रहा है।
- कानूनी स्थिति: उन्होंने प्रधानमंत्री को ध्यान दिलाया कि 2018 में संसद ने संशोधन कर इस कानून को फिर से मजबूत कर दिया था और 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया था। ऐसे में उन युवाओं पर केस चलाना तर्कसंगत नहीं है जिन्होंने इसी मजबूती की मांग की थी।
- संवेदनशीलता की अपील: राहुल गांधी ने आग्रह किया कि सरकार को इन मामलों की समीक्षा कर इन्हें तुरंत वापस लेना चाहिए ताकि “जिन लोगों ने पहले ही अन्याय सहा है, उन्हें और परेशान न किया जाए।”
सोशल मीडिया पर साझा किया संदेश
राहुल गांधी ने इस पत्र को ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा कि मजबूत एससी-एसटी कानून दलितों और आदिवासियों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है और निर्दोष युवाओं को इस बोझ से मुक्त करना सरकार की जिम्मेदारी है।
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार दलित और आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। विशेष रूप से दिल्ली के उत्तम नगर में हुई हालिया झड़प के बाद राहुल गांधी ने भाजपा पर “खून-खराबा चाहने वाली राजनीति” का आरोप लगाया था।

