नई दिल्ली | 25 मार्च, 2026
संसद परिसर में पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के गहराते तनाव पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर कड़ा प्रहार करते हुए उसे एक ‘दलाल देश’ करार दिया। सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका 1981 से ही पाकिस्तान का इस्तेमाल एक बिचौलिए के रूप में करता आ रहा है और भारत ऐसी कोई भूमिका नहीं निभाता। उन्होंने गर्व से कहा, “हम कोई दलाल देश नहीं हैं, हमारी कूटनीति स्वतंत्र और संप्रभु है।”
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में एक विस्तृत प्रस्तुति (Presentation) दी, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों (तेल आपूर्ति) पर सरकार के रोडमैप को साझा किया गया।
बैठक के मुख्य बिंदु और विवाद
| विषय | सरकार का पक्ष | विपक्ष का आरोप |
| भारत की भूमिका | भारत ‘मूक दर्शक’ नहीं है, कूटनीतिक स्तर पर बेहद सक्रिय है। | भारत की प्रतिक्रिया कमजोर है; पाकिस्तान ज्यादा सक्रिय दिख रहा है। |
| पाकिस्तान का हस्तक्षेप | पाकिस्तान दशकों से अमेरिका के लिए केवल एक ‘मैसेंजर’ रहा है। | कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने पूछा- भारत इस संकट में मध्यस्थ क्यों नहीं? |
| ऊर्जा सुरक्षा | संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- तेल की कोई कमी नहीं, हालात स्थिर हैं। | युद्ध लंबा खिंचने पर घरेलू बाजार में कीमतों और आपूर्ति पर चिंता जताई। |

