28 C
Mumbai
Sunday, February 15, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जमीन अधिग्रहण मुआवजे की अपील में ‘देरी’ नहीं बनेगी बाधा, किसानों को बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि तकनीकी आधार पर किसी किसान या जमीन मालिक की अपील को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मुआवजे के खिलाफ दायर अपीलें ‘परिसीमा कानून’ (Limitation Act) से अपने-आप बाहर नहीं होतीं और हाईकोर्ट के पास देरी को माफ करने का पूरा अधिकार है।

नए और पुराने कानून के बीच का विवाद खत्म

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने 1894 के पुराने कानून और 2013 के नए जमीन अधिग्रहण कानून के तालमेल पर विचार करते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

कोर्ट ने फैसला सुनाया कि:

  • यदि अधिग्रहण की प्रक्रिया 1894 के कानून के तहत शुरू हुई थी, लेकिन 1 जनवरी 2014 (नए कानून के लागू होने) से पहले मुआवजे का फैसला नहीं हुआ था, तो ऐसे सभी मामलों में मुआवजा 2013 के नए कानून के तहत ही दिया जाएगा।
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2013 के कानून की धारा 24(1)(ए) ऐसे सभी मामलों पर प्रभावी होगी।

हाईकोर्ट को ‘व्यावहारिक’ होने की सलाह

अक्सर देखा जाता है कि समयसीमा (Deadlines) समाप्त होने के कारण हाईकोर्ट किसानों की अपीलों को सुनने से इनकार कर देते हैं। इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा:

“हाईकोर्ट को ऐसे संवेदनशील मामलों में बेहद सख्त रवैया अपनाने के बजाय एक व्यावहारिक (Practical) नजरिया अपनाना चाहिए। तकनीकी गलतियों की वजह से न्याय के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए।”

फैसले के मुख्य प्रभाव:

  1. देरी की माफी: 2013 के कानून की धारा 74 अब परिसीमा अधिनियम की धारा 5 को लागू होने से नहीं रोकेगी। यानी उचित कारण होने पर देरी से दायर अपील भी स्वीकार होगी।
  2. पुराने आदेश रद्द: सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनमें किसानों की अपीलों को सिर्फ इसलिए खारिज कर दिया गया था क्योंकि वे समय पर नहीं पहुँच पाए थे।
  3. पहली अपील का अधिकार: पीड़ित पक्ष भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट जा सकते हैं, जिसे ‘पहली अपील’ माना जाएगा।

सरकारों को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया है ताकि भविष्य में मुआवजे के निर्धारण में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को उनके अधिकारों से वंचित न किया जाए।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here