27 C
Mumbai
Monday, April 6, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

लोक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट: भारत दुनिया का सबसे बड़ा भूजल उपभोक्ता; जल शक्ति मंत्रालय को सख्त निर्देश

Array

नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2026

लोक लेखा समिति (PAC) ने संसद में पेश अपनी 41वीं रिपोर्ट ‘भूजल प्रबंधन और नियमावली’ में भारत के गिरते भूजल स्तर पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर निकाले जाने वाले कुल भूजल का लगभग 25% हिस्सा अकेले इस्तेमाल करता है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा भूजल उपयोगकर्ता बनाता है।

1. रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: एक भयावह तस्वीर

समिति ने आंकड़ों के जरिए देश की जल सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरे को रेखांकित किया है:

  • वैश्विक हिस्सेदारी: भारत सालाना लगभग 245 क्यूबिक मीटर (BCM) भूजल निकालता है।
  • निर्भरता: देश की 80% पेयजल आवश्यकताएं और 64% सिंचाई की जरूरतें भूजल पर टिकी हैं।
  • अत्यधिक दोहन: देश के 267 जिलों में भूजल निकासी की दर 64% से लेकर 385% तक पाई गई है। चार राज्यों में तो निकासी 100% की सीमा को पार कर चुकी है।

2. जल शक्ति मंत्रालय का पक्ष और वर्तमान सुधार

PAC की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए जल शक्ति मंत्रालय ने कुछ सकारात्मक बदलावों और सरकारी प्रयासों का विवरण साझा किया:

  • निकासी में कमी: मंत्रालय के अनुसार, भूजल निकासी का स्तर 2017 के 63.33% से घटकर अब 59.26% पर आ गया है।
  • सुरक्षित क्षेत्रों में वृद्धि: ‘सुरक्षित’ श्रेणी वाले इलाकों का हिस्सा 62.6% से बढ़कर 73.1% हो गया है, जबकि ‘अत्यधिक दोहन’ वाले क्षेत्र 17% से घटकर 11% रह गए हैं।
  • कुओं का स्तर: 2022 के आंकड़ों के अनुसार, निगरानी वाले 61% कुओं के जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।

3. सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम

भूजल के वैज्ञानिक प्रबंधन और पुनर्भरण (Recharge) के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम कर रही है:

  • अटल भूजल योजना: यह वर्तमान में 7 राज्यों में लागू है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से भूजल प्रबंधन करना है।
  • अमृत सरोवर मिशन: देश भर में जल निकायों के कायाकल्प के लिए।
  • नेशनल एक्विफर मैपिंग (NAQUIM): भूजल भंडारों का वैज्ञानिक मानचित्रण ताकि बेहतर योजना बनाई जा सके।
  • मास्टर प्लान: कृत्रिम भूजल पुनर्भरण (Artificial Recharge) के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान लागू किया जा रहा है।

4. समिति की सिफारिशें

पीएसी ने जल शक्ति मंत्रालय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  • राज्य सरकारों को भूजल की अधिक निकासी रोकने के लिए वित्तीय और नीतिगत रूप से प्रेरित किया जाए।
  • केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है; मौजूदा पहलों को ठोस और दृश्यमान नतीजों में बदलना अनिवार्य है।
  • भूजल संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी ढांचे और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

निष्कर्ष: हालांकि सरकारी प्रयासों से कुछ सुधार दिख रहे हैं, लेकिन 25% वैश्विक हिस्सेदारी का बोझ यह बताता है कि भारत को जल संरक्षण की दिशा में अभी बहुत लंबी यात्रा तय करनी है।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here