नई दिल्ली, 25 मार्च 2026
सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा घेरे को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया गया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, भारतीय विधि परिषद (BCI) और दिल्ली बार काउंसिल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने माना कि शीर्ष अदालत के वकीलों के लिए एक समर्पित कल्याण कोष (Welfare Fund) का निर्माण समय की मांग है, क्योंकि वर्तमान ‘एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट’ की तकनीकी खामियों के कारण इन वकीलों को संकट के समय उचित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
क्या है वर्तमान कानूनी अड़चन? SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह ने दलील दी कि वर्तमान व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट में वकालतनामा दाखिल करते समय लगने वाले वेलफेयर स्टैंप की कमाई सीधे दिल्ली बार काउंसिल के पास चली जाती है। चूंकि नियम के अनुसार लाभ केवल राज्य बार काउंसिल की सूची में दर्ज वकीलों को मिलता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में स्थाई रूप से प्रैक्टिस करने वाले कई वकील इस दायरे से बाहर रह जाते हैं। विशेषकर मेडिकल इमरजेंसी या किसी अनहोनी की स्थिति में उनके पास गृह राज्य की बार काउंसिल से जुड़ाव न होने के कारण सहायता का कोई ठोस साधन नहीं होता।
प्रस्तावित समाधान और नया खाका याचिका में सुप्रीम कोर्ट के नियमों में संशोधन कर ‘नियम 15A’ जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अनिवार्य स्टैंप: सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाले प्रत्येक वकालतनामा पर 500 रुपये का ‘लॉयर्स वेलफेयर स्टैंप’ अनिवार्य किया जाए।
- स्वतंत्र प्रबंधन: इस स्टैंप से होने वाली पूरी आय सीधे शीर्ष अदालत के कल्याण कोष में जमा हो।
- समिति द्वारा संचालन: इस फंड का प्रबंधन भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित किसी जज की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा किया जाए।

