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Saturday, February 24, 2024

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आज फिर दिखी आज़ादी के दीवानों की झलक, देश के किसानों ने लाल किले पर काबिज होकर, फैराया किसान संगठन का झंडा – रवि जी. निगम

Ravi Nigam , रवि जी. निगम ( संपादक/समाज सेवक )
रवि जी. निगम ( संपादक/समाज सेवक )

आपकी अभिव्यक्ति – देश के किसानों और मजदूरों में आज भी वही आज़ादी के दीवानों की झलक, कोई कुुुुछ भी कहेे आज भी आज़ादी के दीवानों केे जुुुुनून को देखा जा सकता है, सही मायने में सच्ची देश भक्ति इन्ही में देखने को मिलती है, लोगो को इससेे सबक लेेेेने की जरूरत, चंद मुठ्ठी भर लोग जो उँगलियों में गिने जा सकते हैं, संपूर्ण देश में एकक्षत्र राज नहीं चला सकते हैं, उन्हे ये ज्ञात होना चाहिये कि जब देश के मतवालों ने अंग्रेजी हुक़ूमत को लोहे के चने चबुवा दिये, तो इनकी क्या बिसात है ?

देश जनता से बनता है चंद वतन परस्त धन और सत्ता लुलोभियों से नहीं, जो देश की जनता का हितैषी नहीं वो देश का हितैषी कैसे हो सकता है ? देश की आन-बान-शान देश के किसानों और मजदूरों से है, इन लुलोभियों से नहीं, इसका अर्थ ये कतई नहीं कि मैं या कोई हिंसा का समर्थन कर रहा है।

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देश के किसानों और मजदूरों को…?

माना कि कानून की नज़र में ये अपराध हो और ये सब भी अपराधी हो, आखिर ये सब करने पर क्यों मजबूर हुए क्या कोई जान-बूझकर जांन जोखिम में डालता है, क्योंकर 60 से ज्यादा लोग मौत के शिकार हो गये, क्या मरने वाले राजनेता थे या दलाल ? इसे कानून की नजर में उचित भी न माना जाये, लेकिन आखिर ये (देश के किसानों और मजदूरों को आप क्या मानते हैं) सब है कौन ? देश के नागरिक ही न, जो कानून बनाने वालों को चुनते हैं, ये देश के गद्दार या दुश्मन तो नहीं ? क्या इसी लिये अपने प्रतिनिधि के रूप में चुन कर शासन में सत्ता संभालने और कानून बनाने का अधिकार अपने प्रतिनिधि के रूप में देते हैं ?

क्या उनका दायित्व नहीं है कि पहले देश के किसानों, मजदूरों और नव जवानों के हित पर गौर करें, न कि चन्द पूंजीपतियों के हित-लाभ को साधते हुए कानूनों की पृष्ठभूमि तैयार करें, इससे ईस्ट इण्डिया के बाद उसके बदले हुए स्वरूप के रूप में देखा जाने लगेगा न्यू इण्डिया को, कि नहीं ? सवाल तो बहुत हैं पर जवाब जीरो है….. देश के किसानों और मजदूरों में ही देश की आत्मा बसती है, धनवानों में नहीं।

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देश के किसानों और मजदूरों में लाला लाजपत, आज़ाद, भगत सिंह आज भी जिंदा हैं ?

नई दिल्ली: तीन कृषि कानूनों के विरोध में गणतंत्र दिवस के मौके पर देश के किसानों की आज ट्रैक्टर रैली हो रही है. दिए गए समय से पहले ही किसानों ने सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर बैरिकेड्स तोड़ दिए, जिसके कारण हंगामा मचा हुआ है. पुलिस ने इससे पहले दावा किया था कि दिल्ली आने वाले सभी बॉर्डर सील है, लेकिन किसानों के हंगामे के चलते पुलिस के सामने भी शांति बनाए रखना एक चैलेंज ही है. ख़बरों के अनुसार ट्रैक्टरों का जत्था लाल क़िले तक पहुँच गया है और लाल क़िले पर किसान संगठन का झण्डा फहरा दिया है।

आईटीओ के पास किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई है. पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे है और लाठीचार्ज किया है. वहीं, किसानों ने पुलिस की गाड़ी में भी तोड़ फोड़ किया है. इससे पहले किसान संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुच चुके. यहां पर किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया. वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पर भी किसानों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे हैं।

लाल किले और इंडिया गेट की ओर बढ़ रहे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके साथ ही लगातार आंसू गैस के गोले दागे जा रहे है। अभी भी किसान आईटीओ पर डटे हैं। इसके साथ ही किसानों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

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दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक- गाजीपुर बॉर्डर के पास किसानों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए हैं. उधर, अक्षरधाम नोएडा मोड़ के पास किसानों और पुलिस के बीच झड़प की खबर हुई है. कुछ जगहों से छिटपुट हिंसा की खबरें हैं. ट्रक समेत कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की खबर भी है. मुबारका चौक पर हालात थोड़े खराब हुए हैं. इसके साथ ही टिकरी बॉर्डर के आगे नांगलोई में भी पुलिस बैरिकेड्स तोड़े गए हैं.

किसानों ने 37 NOC के नियमों का घोर उल्लंघन किया है. पुलिस कई जगह बल प्रयोग भी कर रही है. आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं. ITO पर भी किसानों ने बवाल शुरू कर दिया है. किसानों ने पुलिस की बस को हाईजैक कर लिया है. ITO से लालकिला जाने वाले रास्ते पर भारी मात्रा में पुलिसबल तैनात है।

ये भी बता दें कि जीटी करनाल रोड, आउटररिंग रोड, बादली रोड मधुबन चौक, नरेला रोड पर ट्रैफिक जाम है. इन रास्तों पर न निकलने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही वजीराबाद रोड, आईएसबीटी रोड, पुश्ता रोड, विकास मार्ग, एनएच-24 रोड और नोएडा लिंक रोड पर भी भारी जाम लगा है।

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