मालदा (पश्चिम बंगाल), 3 अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची के सत्यापन (SIR) के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की गंभीर घटना की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और निर्देश के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग ने यह मामला एनआईए को सौंप दिया है। शीर्ष अदालत ने इस घटना पर राज्य प्रशासन की तीखी आलोचना करते हुए पश्चिम बंगाल को “अत्यधिक ध्रुवीकृत राज्य” बताया था।
क्या थी घटना?
बुधवार को मोथाबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने सात न्यायिक अधिकारियों (जिनमें तीन महिला अधिकारी शामिल थीं) का घेराव किया। इन अधिकारियों को लगभग साढ़े सात घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता पर सीधा हमला माना।
मुख्य गिरफ्तारियां और एनआईए की कार्रवाई
- 17 लोग गिरफ्तार: पुलिस ने इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
- ISF उम्मीदवार हिरासत में: गिरफ्तार आरोपियों में ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए दावा किया है कि वे घटना के समय एक धार्मिक सभा में थे।
- एनआईए की टीम: चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, एनआईए की एक विशेष टीम आज (शुक्रवार) पश्चिम बंगाल पहुंचकर मामले के दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेगी और जांच शुरू करेगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने राज्य में चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है:
- ममता बनर्जी का रुख: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा उनकी शक्तियां छीनने की कोशिश कर रहे हैं।
- भाजपा का हमला: विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा ने इसे “अराजकता का चरम” बताते हुए ममता सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को सुरक्षा देने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की हिंसा या बाधा डालने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी।

