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Sunday, July 25, 2021

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हद करदी आपने: मोदी सरकार कथनी और करनी में फर्क, “आयुष्मान भारत” का ढिंढोरा, कोरोना के इलाज के लिए 5 लाख का कर्ज का कटोरा !

आपकी अभिव्यक्ति … हद करदी आपने

"फ़ानूस बनके जिसकी हिफ़ाजत संवैधानिक संस्थान करें, वो सरकार क्या डरे जिसे रौशन सुप्रीम संस्थान करें," - रवि जी. निगम
Ravi Nigam

हद करदी आपने प्रभू “आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना” का ढिंढोरा तो आपने खूब पीटा लेकिन सच्चाई तो ये है कि आपकी कथनी और करनी में जमींन और आसमान का अंतर है, जानते हैं क्यों ? क्योंकि “आयुष्मान भारत” की डुगडुगिया ये कह कर पीटी जा रही थी कि “आयुष्मान भारत” योजना के अंतर्गत पांच लाख रूपये के मेडिकल कवर से कवर होंगे लोग, इतना ही नहीं ये भी प्रचार-प्रसार किया गया कि इसका लाभ देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा के रूप में मिल रहा है, लेकिन सच मायने में इसका लाभ किसे मिल रहा या मिला ये तो प्रभु ही जानें ?

लेकिन एक सवाल यक्षप्रश्न की तरह मेरे दिमाग में कौतुहल कर रहा है कि जब प्रभू की इतनी अच्छी योजना चल रही थी तो देश में जब पिछले वर्ष कोरोना की आपदा आयी तो ये लाभ उन्हे क्यों नहीं दिया गया उन्हे उससे क्योंकर वंचित रखा गया ? यदि जब 10 करोड़ परिवारों को इसका लाभ दिया जा रहा है तो प्रभू ये बताइये कि कोरोना में अब तक पूरे देश में कितने लोग प्रभावित हुये सरकारी आकडों के अनुसार भी लगभग 3 करोड़ लोग ही संक्रमित हुये हैं।

तो क्या यदि इसका लाभ इस योजना के अंतर्गत इन्हे भी दिया गया होता जो प्रचार-प्रसार में किया गया है तो क्या आज जो लगभग 3.75 लाख लोगों की मौत हुई है तो क्या ये आकडा इतना बडा होता तो सायद नहीं, क्योंकि प्रचार-प्रसार से जमींनी हक़ीकत कुछ और ही होती है, क्योंकर अब पांच लाख मेडिकल कवर का दावा करने वाली सरकार आज अपनी जनता को अपने ही सरकारी बैंक के माध्यम से 8.5 प्रतिशत के दर से कोरोना इलाज के लिये व्याज पर रकम देने पर उतर आयी ? हुजूर सवाल अनगिनत हैं लेकिन जवाब एक भी नहीं क्यों?

हुजूर के पास बडे-बडे चाणक्य और प्लानर लेकिन जनता के हितलाभ से कोई सरोकार नहीं क्यों ? दो करोड़ सालाना नौकरी देनेवाली सरकार के मुखिया मिली हुई नौकरी से वंचित करने पर अमादा क्यों ? देश में जब एक राष्ट्र और एक नियन का दंभ भरने वाली सरकार तो वैक्सीन के लिये दो नियम क्यों ? 75 प्रतिशत को फ्री वैक्सीन तो लूट के लिये 25 प्रतिशत के लिये प्राइवेट के माध्यम से वैक्सीन क्यों ? क्या देश में 25 प्रतिशत पूँजीपति हैं नागरिक तो उनके लिये फ्री वैक्सीन नहीं क्यों ? कहते हैं “हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और..!” सच हैं न प्रभू …..!!

मानवाधिकार अभिव्यक्ति “जनता की अभिव्यक्ति”

नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक ने अपने उन खाताधारकों को लोन देने की स्कीम शुरू कर दी है, जिन्हें कोविड-19 के इलाज के लिए पैसे की जरूरत है. एसबीआई कवच पर्सनल लोन स्कीम के तहत खाताधारकों या उनके परिवार के सदस्यों के कोरोना के इलाज के लिए लोन दिए जा रहे हैं.

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अगर खाताधारक या उसके परिवार का कोई सदस्य 1 अप्रैल 2021 या इसके बाद कोरोनो पॉजीटिव पाया जाता है तो वह इलाज के लिए इस स्कीम के तहत लोन ले सकता है. लोन के तहत इलाज के लिए पहले के खर्च को भी कवर किया गया है. यह लोन वेतन, गैर वेतन शुदा या गैर पेंशनर समेत सभी खाताधारकों को मिल सकता है.

कोरोना के इलाज के लिए इस पर्सनल लोन की ब्याज दर फिलहाल 8.5 फीसदी रखी गई है . इसके तहत पांच लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. लोन की अवधि पांच साल तक की है. इसमें तीन महीने की मोराटोरियम अवधि भी शामिल है.

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60 महीने के लिए दिए जाने वाले इस लोन में तीन महीने की ईएमआई छूट शामिल है. यानी ग्राहक को सिर्फ 57 महीने की ही ईएमआई ही देनी होगी. इस स्कीम के तहत न्यूनतम 25 हजार और अधिकतम पांच लाख रुपये तक लोन लिया जा सकता है. इसके लिए कोई प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपोजिट और प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं लगेगी . लोन के लिए कोई फोरक्लोजर चार्ज भी नहीं लगेगा

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लोन के लिए किसी भी एसबीआई ब्रांच के साथ योनो ऐप पर अप्लाई किया जा सकता है. प्री अप्रूव्ड पर्सनल लोन के लिए योनो ऐप पर अप्लाई किया जा सकता है. अगर आप एसबीआई से कोरोना के इलाज के खर्चे के लिए लेते हैं तो इसे जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश करें. लोन को पूरे पांच साल की अवधि तक न रखें. इससे आप पर ब्याज का बोझ बढ़ता जाएगा.

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