नई दिल्ली | 28 मार्च, 2026
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते तनाव और युद्ध की स्थितियों के बीच ‘अमर उजाला’ के विशेष कार्यक्रम ‘खबरों के खिलाड़ी’ में देश के वरिष्ठ पत्रकारों ने भारत पर पड़ने वाले इसके आर्थिक और कूटनीतिक प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट केवल तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो यह भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है। चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा ने भाग लिया और सरकार की तैयारियों व विपक्ष के सवालों का विश्लेषण किया।
ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू आपूर्ति पर दबाव; 67 दिनों के रिजर्व और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर नई दिल्ली | 28 मार्च, 2026
चर्चा के दौरान राकेश शुक्ल ने बताया कि सरकार के पास वर्तमान में 67 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Reserve) मौजूद है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि तनाव के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारतीय टैंकर सुरक्षित निकल पा रहे हैं। वहीं, पूर्णिमा त्रिपाठी ने जमीनी हकीकत पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और एलपीजी सिलेंडर की रिफिलिंग में देरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) स्थिति को और बिगाड़ सकती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्यों को ‘कोविड काल’ की तरह मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

