नई दिल्ली, 27 मार्च 2026
पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के खिलाफ चल रही जांच में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका को स्वीकार करते हुए आदेश दिया है कि गिरफ्तार किए गए अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों के मामले की सुनवाई अब एनआईए मुख्यालय के सुरक्षित परिसर में होगी।
सुरक्षा कारणों से बदला गया सुनवाई का स्थान
एनआईए ने अदालत में दलील दी थी कि यह मामला न केवल बेहद संवेदनशील है, बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रभाव भी गहरे हैं। एजेंसी ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए अनुरोध किया था कि आरोपियों को सार्वजनिक अदालत में पेश करने के बजाय बंद कमरे (In-camera) में सुरक्षित स्थान पर सुनवाई की जाए। जज ने इन परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य की सभी कार्यवाहियों को एनआईए मुख्यालय स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।
कौन हैं ये विदेशी आरोपी और क्या हैं आरोप?
इस मामले में कुल सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनका विवरण इस प्रकार है:
- अमेरिकी नागरिक: मैथ्यू आरोन वैनडाइक (कोलकाता से गिरफ्तार)।
- यूक्रेनी नागरिक (6): पेट्रो हुबरा, तारास स्लीव्याक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की (दिल्ली और लखनऊ से गिरफ्तार)।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे:
- वीजा का दुरुपयोग: ये सभी आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन अवैध रूप से मिजोरम के रास्ते म्यांमार सीमा में प्रवेश कर गए।
- आतंकवादी प्रशिक्षण: इन पर म्यांमार के उग्रवादियों को अत्याधुनिक हथियार चलाने और घातक ड्रोन ऑपरेशन्स की ट्रेनिंग देने का संगीन आरोप है।
- हथियारों की तस्करी: जांच के अनुसार, इन्होंने यूरोप से ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग मशीनें मंगवाकर उग्रवादियों तक पहुंचाईं।
- बड़ी साजिश: एनआईए का मानना है कि यह गिरोह साल 2024 से सक्रिय था और पूर्वोत्तर भारत की शांति भंग करने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा था।

