300 करोड़ की रिश्वत का आखिर वह क्या है मामला, सत्यपाल मलिक से हुई जिसमें पूछताछ

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    मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वो अपने बयानों नहीं बल्कि सीबीआई से पूछताछ को लेकर चर्चा में हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने मलिक से यह पूछताछ उनके उन आरोपों को लेकर की जिसमें उन्होंने दावा किया था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे, तो उन्हें दो फाइलों को क्लियर करने के लिए 300 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की गई थी। आज हम आपको इस पूरे मामले के बारे में बताने जा रहे हैं। 

    दरसअल, राजस्थान के झुंझुनू में पिछले साल 17 अक्टूबर को एक कार्यक्रम के दौरान सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब वे जम्मू-कश्मीर के उप ‘दो फाइल मेरे पास आई थी। एक सचिव ने मुझे बताया कि अगर मैं इन्हें मंजूर कर देता हूं तो मुझे हर एक के लिए 150 करोड़ रुपए मिलेंगे। मैंने यह कहते हुए पेशकश ठुकरा दी कि मैं कश्मीर में पांच कुर्ता पजामा लेकर आया था और इनके साथ ही वापस जाऊंगा।’ मलिक इन आरोपों की अब सीबीआई जांच कर रही है।

    सीबीआई जांच के ऐलान के बाद इस साल अप्रैल में मलिक ने कहा था कि वे सीबीआई जांच के लिए तैयार हैं और जांच में अतिरिक्त जानकारी भी देंगे। केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर किसानों की ओर से विरोध का समर्थन करने वाले सत्यपाल मलिक राज्यपाल रहते हुए भी इन मुद्दों पर मुखर रहे।

    मलिक ने खुलेतौर पर नहीं लिया है किसी का नाम

    राज्यपाल ने कहा था कि इस बारे में उन्होंने पीएम मोदी को सूचित किया था और ‘पीएम ने यह कहते हुए मेरा समर्थन किया था कि भ्रष्टाचार में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने दावा किया कि रिश्वत के तार आरएसएस और भारत बड़े उद्योगपति से जुड़े हुए थे। हालांकि, उन्होंने खुलेतौर पर किसी का नाम नहीं लिया था। 

    23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक थे राज्यपाल

    सत्यपाल मलिक 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे। भारत सरकार की ओर से पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाते हुए उसे केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया। जिसके बाद यहां उपराज्यपाल की तैनाती की गई।

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