नई दिल्ली, 24 मार्च 2026
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने मंगलवार को कश्मीर अलगाववाद षड्यंत्र मामले में प्रतिबंधित संगठन ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ (डीईएम) की संस्थापक आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही संगठन की महासचिव नाहिदा नसरीन और प्रेस सचिव सोफी फहमीदा को 30-30 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने इन तीनों महिलाओं को जम्मू-कश्मीर को भारत संघ से अलग करने के लिए विध्वंसक आंदोलन चलाने, नफरत फैलाने और जिहाद भड़काने का दोषी पाया। जुलाई 2018 में गिरफ्तार की गई इन आरोपियों के खिलाफ एनआईए ने सोशल मीडिया चैट, वीडियो और भड़काऊ साक्षात्कारों के आधार पर पुख्ता सबूत पेश किए थे, जिससे देश की अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालने की उनकी सक्रिय भूमिका स्पष्ट हुई।
सजा के विवरण के अनुसार, आसिया अंद्राबी पर उम्रकैद के साथ 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि नाहिदा और सोफी पर 7-7 लाख रुपये का आर्थिक दंड आरोपित किया गया है। उल्लेखनीय है कि आसिया का पति आशिक हुसैन फकतू भी एक हत्या के मामले में पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि इन महिलाओं ने विभिन्न सार्वजनिक मंचों का उपयोग करके घाटी में हिंसा को बढ़ावा दिया और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के साथ मिलकर अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम दिया। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत द्वारा जनवरी में दोषी ठहराए जाने के बाद आज इस ऐतिहासिक फैसले से कश्मीर में सक्रिय आतंकी और अलगाववादी नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है।

