जैश-ए-मोहम्मद कमांडर सैफुल्ला समेत तीन ढेर आतंकियों और मददगार मनीर अहमद के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश
जम्मू: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हुए आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को जम्मू स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट में एक विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। 535 पन्नों की यह चार्जशीट सुरक्षा बलों और नागरिकों पर कायराना हमले की साजिश रचने वाले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों और उन्हें स्थानीय स्तर पर रसद व पनाह मुहैया कराने वाले मददगारों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई के तहत पेश की गई है।
जांच एजेंसी द्वारा दायर चार्जशीट में गिरफ्तार स्थानीय आरोपी मनीर अहमद (पुत्र मोहम्मद यूसुफ कोली, निवासी नाइडगाम, चत्रू, इंदरवाल, जिला किश्तवाड़) के अलावा मुठभेड़ में मारे गए तीन पाकिस्तानी आतंकियों के नाम शामिल हैं। मारे गए इन विदेशी आतंकियों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का कुख्यात कमांडर सैफुल्ला (उर्फ सैफुल्ला कश्मीरी, उर्फ अतीक नजीर, उर्फ अतीक उर रहमान) भी शामिल है। यह मामला 22 फरवरी 2026 को किश्तवाड़ के चत्रू स्थित वानी मोहल्ला, पासेर कोट में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हुए हिंसक आतंकी हमले (केस संख्या RC-03/2026/NIA/JMU) से संबंधित है।
एनआईए ने अपनी जांच रिपोर्ट में अदालत को बताया कि आरोपी मनीर अहमद ने किश्तवाड़ के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों को जानबूझकर सुरक्षित पनाह दी, उनके ठहरने और छिपने का प्रबंध किया तथा सुरक्षा बलों की गतिविधियों की टोह लेने में मदद की। इस आपराधिक कृत्य के लिए मनीर अहमद के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूए (पी) एक्ट, 1967 के कड़े प्रावधानों के तहत आरोप तय किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, जांच एजेंसी ने चार्जशीट में सीमा पार पाकिस्तान से रची गई भारत विरोधी साजिशों और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने से जुड़े डिजिटल, फॉरेंसिक व दस्तावेजी साक्ष्यों का पूरा ब्योरा पेश किया है। एनआईए का कहना है कि घाटी और जम्मू संभाग के पहाड़ी जिलों में अशांति फैलाने के मकसद से जैश के आतंकी मॉड्यूल को सक्रिय किया गया था, जिसे सुरक्षा बलों ने समय रहते ध्वस्त कर दिया। अदालत अब इन आरोपों के आधार पर मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी।

