28 अक्तूबर 2025 को समाप्त हो चुका था ट्रस्टी का कार्यकाल; आंतरिक फैसलों पर सवाल उठाने को बताया आधारहीन
मुंबई: टाटा ट्रस्ट्स समूह से जुड़े दो प्रमुख धर्मार्थ न्यासों ने गुरुवार को मेहली मिस्त्री के उस विधिक व प्रशासनिक अधिकार को सीधे तौर पर चुनौती दी है, जिसके तहत वह ट्रस्टों के दैनिक कामकाज और आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन ने चैरिटी कमिश्नर कार्यालय में औपचारिक हलफनामा दाखिल करते हुए स्पष्ट किया कि मेहली मिस्त्री का ट्रस्टी के रूप में निर्धारित कार्यकाल 28 अक्तूबर 2025 को ही पूरा हो चुका था। लिहाजा, वर्तमान में ट्रस्टों के संचालन या निर्णयों पर उंगली उठाने का उनके पास कोई वैधानिक अधिकार शेष नहीं है।
दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के करीबी सहयोगी माने जाने वाले मेहली मिस्त्री ने कथित तौर पर चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी याचिका में उन्होंने दोनों ट्रस्टों के भीतर प्रशासनिक विसंगतियों, हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) और शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
ट्रस्टों की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे में इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा गया है कि जब आवेदक का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, तो वह संस्थान के मामलों में हस्तक्षेप करने के हकदार नहीं रह जाते। न्यास प्रबंधन ने रेखांकित किया कि सभी प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय निर्धारित नियमों, ट्रस्ट डीड और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों के तहत ही लिए जा रहे हैं।
चैरिटी कमिश्नर के समक्ष इस मामले के पहुंचने के बाद कॉर्पोरेट और परोपकारी हलकों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोनों प्रमुख ट्रस्टों द्वारा मिस्त्री की विधिक स्थिति पर सवाल उठाए जाने के बाद अब चैरिटी कमिश्नर कार्यालय इस कानूनी बिंदु पर सुनवाई करेगा कि क्या कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व ट्रस्टी द्वारा उठाई गई शिकायतों पर आगे कोई प्रशासनिक जांच बनती है या नहीं।

