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डिजिटल सुरक्षा के लिए भारत सरकार का ‘एआई कवच’: गृह मंत्रालय ने संसदीय समिति को सौंपा सुरक्षा का पूरा रोडमैप

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नई दिल्ली, 31 मार्च 2026

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों और जटिल अपराधों से निपटने के लिए भारत सरकार ने अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली ‘संचार और सूचना प्रौद्योगिकी’ संबंधी संसदीय स्थायी समिति के समक्ष गृह मंत्रालय ने विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। मंत्रालय ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां अब सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मौजूद विशाल डेटा के विश्लेषण के लिए एआई टूल्स का उपयोग कर रही हैं, जिससे जांच की गति और सटीकता में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

सुरक्षा एजेंसियों के तरकश में नए एआई हथियार

गृह मंत्रालय ने समिति को उन विशिष्ट तकनीकों की जानकारी दी जो वर्तमान में आतंकवाद विरोधी अभियानों और अपराध नियंत्रण में उपयोग की जा रही हैं:

  • एंटीटी रिजॉल्यूशन (Entity Resolution): यह एक विशेष एआई टूल है जो अलग-अलग डेटा स्रोतों (जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सरकारी रिकॉर्ड आदि) में छिपे एक ही संदिग्ध व्यक्ति की सटीक पहचान करने और उसके संपर्कों के नेटवर्क का पर्दाफाश करने में सक्षम है।
  • नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP): इसके जरिए विभिन्न भाषाओं में किए गए पोस्ट और संदेशों का विश्लेषण कर कट्टरपंथी विचारधारा या सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले तत्वों की पहचान की जा रही है।
  • डेटा स्क्रैपिंग और मॉनिटरिंग: कंप्यूटर प्रोग्राम्स के माध्यम से एक्स (X), फेसबुक और यूट्यूब पर डीपफेक, मॉर्फ्ड मीडिया और फर्जी खबरों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
  • हनीट्रैप और स्कैम पर प्रहार: मैट्रिमोनियल और डेटिंग साइट्स पर सक्रिय ब्लैकमेलिंग रैकेट और टेलीग्राम पर बम बनाने के ट्यूटोरियल साझा करने वाले समूहों को ट्रैक करने में यह तकनीक ‘गेम चेंजर’ साबित हो रही है।

निजता (Privacy) के सवाल पर सरकार का रुख

संसदीय समिति द्वारा नागरिकों की प्राइवेसी को लेकर पूछे गए सवाल पर गृह मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है:

  • ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT): एजेंसियां केवल उसी डेटा का विश्लेषण करती हैं जो इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
  • कोई व्यक्तिगत उल्लंघन नहीं: मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया में किसी भी नागरिक के निजी या सुरक्षित डेटा (Private Data) में सेंध नहीं लगाई जाती है, जिससे निजता के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।

आतंकवाद के खिलाफ बढ़ती क्षमता

सरकार का मानना है कि ‘फेशियल रिकग्निशन’ और नेटवर्क एनालिसिस जैसी तकनीकों ने काउंटर-इंटेलिजेंस की क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। इससे संदिग्धों की गतिविधियों को रियल-टाइम में ट्रैक करना और समय रहते सटीक निर्णय लेना संभव हो पाया है। गृह मंत्रालय की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत अब साइबर स्पेस को सुरक्षित रखने के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक एआई बुनियादी ढांचे की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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