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Wednesday, November 4, 2026

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग के फॉर्म-6 स्पष्टीकरण पर भड़के जयराम रमेश, बताया शब्दों का खेल

एसआईआर प्रक्रिया की खामियों को छिपाने की कोशिश का लगाया आरोप, सोशल मीडिया पर उठाए तीखे सवाल

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा फॉर्म-6 को लेकर जारी किए गए नवीनतम स्पष्टीकरण की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आयोग के इस कदम को महज ‘शब्दों का खेल’ करार देते हुए कहा कि इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बजाय और अधिक भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ताजा बयान से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी रूपरेखा और प्रक्रिया की गंभीर खामियां खुलकर सामने आ गई हैं।

मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक विस्तृत बयान में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आयोग अपनी प्रशासनिक गलतियों और खामियों पर पर्दा डालने तथा नुकसान की भरपाई करने की भरसक कोशिशों में जुटा हुआ है। हालांकि, आयोग का ऐसा हर नया प्रयास एसआईआर प्रक्रिया की अंतर्निहित कमजोरियों और जमीनी विसंगतियों को ही उजागर कर रहा है।

जयराम रमेश ने तर्क देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग का फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए एक बुनियादी दस्तावेज है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह फॉर्म स्पष्ट रूप से आवेदकों से पूछता है कि क्या वे पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहे हैं। ऐसे में आयोग द्वारा दी जा रही नई तकनीकी दलीलें जमीनी वास्तविकताओं और फॉर्म के मूल प्रारूप से मेल नहीं खाती हैं।

कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे संवेदनशील लोकतांत्रिक कार्य में पारदर्शिता और सटीकता का होना अनिवार्य है। लेकिन जिस तरह से नियमों और स्पष्टीकरणों में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं, उससे चुनावी मशीनरी की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर संशय की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

अपने बयान के अंत में जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग से तकनीकी अस्पष्टताओं को दूर करने और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी व त्रुटिहीन बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद निष्पक्ष मतदाता सूची पर टिकी है, इसलिए आयोग को केवल शब्दों की बाजीगरी करने के बजाय जमीनी स्तर पर मतदाताओं की चिंताओं और प्रक्रियात्मक खामियों का ठोस समाधान करना चाहिए।

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