पीएमएलए की गहन जांच के बिना ईसीआईआर खारिज करने का आरोप, फैसला सुनाने में पांच महीने की देरी पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस हालिया आदेश को देश की शीर्ष अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत समाचार पोर्टल ‘न्यूज़क्लिक’ और उसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का मामला पूरी तरह रद्द कर दिया गया था। जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट के इस न्यायिक निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है।
यह संपूर्ण विवाद न्यूज़क्लिक और उसके संपादकीय प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध विदेशी वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हुआ है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में तकनीकी और कानूनी आधारों का हवाला देते हुए पोर्टल और उसके प्रधान संपादक के विरुद्ध दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को निरस्त करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में ईडी ने जोरदार दलील दी है कि हाईकोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले की वास्तविक विषय-वस्तु और साक्ष्यों की गहन जांच किए बिना ही ईसीआईआर को रद्द करने का एकतरफा आदेश पारित कर दिया। एजेंसी का दावा है कि वित्तीय गड़बड़ियों और विदेशी फंडिंग के गंभीर तथ्यों को उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना खारिज नहीं किया जाना चाहिए था।
इसके साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले के न्यायिक प्रक्रियात्मक पहलुओं पर भी औपचारिक आपत्ति जताई है। ईडी ने अपनी याचिका में विशेष रूप से रेखांकित किया है कि हाईकोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और उसे सार्वजनिक रूप से सुनाने में लगभग पांच महीने का लंबा समय लगाया, जो स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के संदर्भ में उचित नहीं है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने ईडी की इस विशेष अनुमति याचिका को औपचारिक सुनवाई के लिए किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध नहीं किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जब यह मामला शीर्ष अदालत की अवकाशकालीन या नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगा, तब विदेशी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत बहस देखने को मिल सकती है।

