आधार और पैन जारी करने की व्यवस्था पर जताई चिंता, सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी पर उठाए सवाल
मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिकों द्वारा भारत में अवैध घुसपैठ के बाद अपनी पहचान छिपाकर आधार और पैन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल करने के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने कहा कि यह एक बेहद चिंताजनक तरीका सामने आया है, जो विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल और दस्तावेजों के सत्यापन में गंभीर खामियों को दर्शाता है।
अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार की सभी संबंधित जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि ऐसे अवैध घुसपैठियों की तुरंत पहचान की जाए और प्राथमिकता के आधार पर उनके निर्वासन (Deportation) की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए।
फर्जी पहचान दस्तावेजों से राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा खतरा पीठ ने रेखांकित किया कि गलत और फर्जी तरीकों से हासिल किए गए पहचान दस्तावेज देश की आंतरिक सुरक्षा, आव्रजन (Immigration) और नागरिक सत्यापन की पूरी व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन सकते हैं। अदालत ने केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों से नियमों और कानूनों में आवश्यक संशोधन करने पर विचार करने को कहा, ताकि सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों का समय रहते पता लगा सकें। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच और निर्वासन की प्रक्रिया तय समयसीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक देरी का लाभ किसी भी घुसपैठिए को न मिल सके।

