मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने रविवार को एनसीपी नेता शरद पवार का काफिला रोका। इस दौरान उन्होंने सोलापुर के बार्शी में हुई रैली में एनसीपी के विरोध में नारेबाजी की। साथ ही काले झंडे दिखाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मनोज जारांगे के समर्थन में नारे लगाए।
रविवार को मराठा आरक्षण के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कुर्दुवाड़ी गांव के पास एनसीपी नेता शरद पवार का काफिला रोका। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का समर्थन करने की बात कर रहे हैं। लेकिन इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख नहीं घोषित करते।
इसके बाद कुछ युवा बार्शी शहर में शरद पवार की रैली में पहुंचे और कोटा नेता मनोज जारांगे के समर्थन में नारे लगाए। जब पवार भाषण देने पहुंचे तो युवाओं ने काले झंडे भी दिखाए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि चार युवकों ने पवार की रैली में जारांगे के समर्थन में नारे लगाए। सुरक्षा गार्डों और पुलिस कर्मियों ने उनको रोका और हिरासत में लिया।
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता है मनोज
मराठा आरक्षण आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जारांगे पाटिल मूलत: बीड जिले के रहने वाले हैं। मटोरी गांव में जन्मे मनोज ने 12वीं तक पढ़ाई की है। आजीविका के लिए बीड से जालना आ गए। यहां एक होटल में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक कार्य शुरू किए। इसी दौरान शिवबा नामक संगठन की स्थापना की। मनोज 2011 से मराठा आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। 2014 में उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में डिविजनल कमिश्नरेट के खिलाफ अपने मार्च से सभी का ध्यान खींचा था। 2015 से 2023 के बीच उन्होंने 30 से ज्यादा आंदोलन किये। 2021 में उन्होंने जालना जिले के साष्टा पिंपलगांव में 90 दिनों की हड़ताल की थी। बताया जाता है कि मनोज जरांगे की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन उन्होंने खुद को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया है। उनके पास चार एकड़ जमीन थी जिसमें से दो एकड़ जमीन उन्होंने मराठा समुदाय के आंदोलन के लिए बेच दी थी।

