मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी माने जाने वाले विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने मंगलवार (30 जून 2026) को सबको हैरान करते हुए महाराष्ट्र विधान परिषद (Legislative Council) के उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सचिन अहीर ने यह नामांकन भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेतृत्व वाले महायुति (Mahayuti) गठबंधन के सीधे विधिक व राजनीतिक समर्थन से दाखिल किया है। इस कदम के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर की जमकर सराहना की है।
1. “वे जमीनी कार्यकर्ता हैं, उनके आने से शिवसेना मजबूत होगी” — एकनाथ शिंदे
नामांकन प्रक्रिया के बाद पत्रकारों से विधिक व राजनीतिक बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर का महायुति में स्वागत किया और उनके इस कदम को शिवसेना के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया:
- जमीनी पकड़ की तारीफ: शिंदे ने कहा, “सचिन अहीर एक सच्चे और जमीनी कार्यकर्ता हैं, जो हमेशा पार्टी के आम कार्यकर्ताओं से घनिष्ठ संबंध बनाए रखते हैं। महायुति के साथ विधिक व राजनीतिक गठबंधन करने का उनका यह निर्णय शिवसेना को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करेगा।”
- पुरानी कड़ियों का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में भी अविभाजित शिवसेना के विधायकों ने ही सचिन अहीर को विधान परिषद के लिए चुनकर भेजा था, और अब सत्तारूढ़ महायुति सरकार उन्हें परिषद के उपाध्यक्ष (Deputy Chairperson) जैसे गरिमामयी विधिक पद के लिए अपना पूर्ण समर्थन दे रही है।
इस संयोग पर मुस्कुराते हुए शिंदे ने कहा, “हम यहां किसी विधिक ढांचे या रिश्ते को तोड़ने के लिए नहीं आए हैं। हम नए लोगों को अपने साथ जोड़ रहे हैं और लोग विकास की राजनीति को देखकर हमारे साथ स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं।”
ठाकरे गुट के लिए बहुत बड़ा विधिक व सांगठनिक झटका
सचिन अहीर का इस प्रकार अचानक महायुति के पाले में जाकर उपाध्यक्ष पद का पर्चा भरना उद्धव ठाकरे और विशेषकर आदित्य ठाकरे के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक और विधिक झटका माना जा रहा है। सचिन अहीर मुंबई और विशेषकर वर्ली क्षेत्र में आदित्य ठाकरे के राजनीतिक प्रबंधन की मुख्य धुरी थे।
इस विधिक नामांकन के बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के भीतर संख्या बल का समीकरण पूरी तरह महायुति के पक्ष में झुक गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सचिन अहीर का यह कदम राज्य की राजनीति में कई नए विधिक और दलीय समीकरणों को जन्म देगा। इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विधिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।

