नई दिल्ली | 24 मार्च, 2026 आतंकवाद विरोधी मामलों में तेजी लाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र समेत 17 राज्यों को आदेश दिया है कि वे विशेष एनआईए (NIA) अदालतों के माध्यम से यूएपीए (UAPA) के तहत दर्ज मामलों के मुकदमों को एक साल के भीतर निपटाने का प्रयास करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में 10 या उससे अधिक एनआईए मामले लंबित हैं, वहां अनिवार्य रूप से विशेष एनआईए अदालतें स्थापित की जाएं। पीठ ने जोर देकर कहा कि इन अदालतों में समर्पित न्यायाधीश और विशेष लोक अभियोजक तैनात होने चाहिए, ताकि दैनिक सुनवाई सुनिश्चित की जा सके और औसतन हर महीने एक मामले का निपटारा हो सके।
केंद्र देगा प्रति अदालत 2 करोड़ रुपये की सहायता; राज्यों और उच्च न्यायालयों को समयसीमा तय नई दिल्ली | 24 मार्च, 2026 सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि केंद्र सरकार प्रत्येक विशेष एनआईए अदालत की स्थापना के लिए एक बार के लिए 1 करोड़ रुपये और वार्षिक संचालन खर्च के लिए अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि राज्यों को बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि राऊज़ एवेन्यू कोर्ट परिसर में 15 विशेष अदालतें तैयार की जा रही हैं, जो अप्रैल 2026 तक संचालित हो जाएंगी। वहीं, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों को अपने संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से परामर्श कर अतिरिक्त अदालतें गठित करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन विशेष अदालतों के न्यायाधीशों को अन्य दीवानी या फौजदारी मामलों में व्यस्त न रखा जाए ताकि वे केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

