सरकार ने छह क्षेत्रों को घोषित किया है प्रतिबंधित जोन; याचिकाकर्ताओं ने बताया बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन
अहमदाबाद: गुजरात के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल सोमनाथ और उसके आसपास के धार्मिक क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की बिक्री तथा भंडारण पर राज्य सरकार द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंध का विवाद अब न्यायिक चौखट पर पहुंच गया है। सरकार की इस अधिसूचना के विरोध में स्थानीय होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख करते हुए फैसले को रद्द करने की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि इस एकतरफा सरकारी आदेश से वर्षों से चल रहे उनके वैध कारोबार ठप हो गए हैं और आजीविका छिन गई है, जो संविधान के तहत मिले आजीविका और व्यापार के मौलिक अधिकारों का खुला हनन है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, गुजरात सरकार ने इसी वर्ष अगस्त माह में एक औपचारिक अधिसूचना जारी कर सोमनाथ नगर पालिका और समीपवर्ती धार्मिक महत्व के इलाकों में मांसाहारी भोजन पकाने, बेचने तथा उसका भंडारण करने पर पूर्ण रोक लगा दी थी। प्रशासन ने इसके लिए छह विशिष्ट इलाकों को चिन्हित कर उन्हें ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ घोषित किया था, ताकि तीर्थनगरी में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और पवित्रता को किसी भी तरह का आघात न पहुंचे।
इस पाबंदी के तहत ऐतिहासिक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के 500 मीटर के दायरे के अलावा आसपास के अन्य प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों को शामिल किया गया है। प्रतिबंध लागू होने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर इसका विरोध देखने को मिल रहा था।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में रेस्टोरेंट मालिकों ने कहा है कि सदियों से चली आ रही व्यावसायिक व्यवस्था को बिना किसी वैकल्पिक रोजगार या मुआवजे के अचानक बंद कर देना अनुचित है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि इस अधिसूचना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, ताकि प्रभावित परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट न खड़ा हो। अदालत द्वारा जल्द ही इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई किए जाने की संभावना है।

