12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बीजिंग दौरे के बाद भारत-चीन संबंधों में जमी बर्फ पिघलने के संकेत
नई दिल्ली:
भारत और चीन के बीच गलवान घाटी की घटना के बाद से बने कड़वाहट भरे संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में बड़ी राजनयिक प्रगति देखने को मिल रही है। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाले ‘ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026’ (BRICS Summit 2026) में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भागीदारी को लेकर भारत ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
यदि यह दौरा आकार लेता है, तो वर्ष 2019 में महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद, शी जिनपिंग का 7 साल बाद पहला भारत दौरा होगा।
बैकचैनल डिप्लोमेसी: मिस्री का सफल बीजिंग दौरा
भारत-चीन रिश्तों में आई कड़वाहट को दूर करने में हालिया उच्चस्तरीय मुलाकातों की अहम भूमिका रही है:
- विदेश सचिव का दौरा (27-28 जुलाई 2026): भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया। उन्होंने चीन के उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग, सीपीसी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री सुन हैयान सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति, व्यापारिक संबंधों में सुधार और सीधी उड़ानों को बहाल करना था।
- जयशंकर-वांग यी वार्ता (22 जुलाई 2026): मनीला (फिलीपींस) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, वीजा नियमों में ढील और व्यापार असंतुलन जैसे विषयों पर सहमति बनी।
- NSA स्तर की वार्ता (जून 2026): भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और वांग यी के बीच दिल्ली में हुई रचनात्मक चर्चा ने संबंधों को सुधारने का रोडमैप तैयार किया।
2020 गलवान विवाद के बाद रिश्तों की स्थिति
वर्ष 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्ते 1962 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, अगस्त-सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तियानजिन (चीन) में आयोजित ‘एससीओ शिखर सम्मेलन’ (SCO Summit) में हिस्सा लेने के बाद दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर संवाद का माहौल फिर से बनना शुरू हुआ।
भारत ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच संबंध पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों की समझ पर ही स्थायी और मजबूत हो सकते हैं।

