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Monday, August 8, 2022

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सुप्रीम कोर्ट का ईडी निदेशक के कार्यकाल विस्तार को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मौजूदा निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल के विस्तार को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली के साथ ही भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमना की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया और मामले को 10 दिनों के बाद आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “हम सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हैं। (मामले को) 10 दिनों के बाद सूचीबद्ध किया जाता है।”

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शीर्ष अदालत तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं – डॉ. जया ठाकुर, रणदीप सिंह सुरजेवाला, साकेत गोखले, महुआ मोइत्रा द्वारा दायर आठ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं को अधिवक्ता एम. एल. शर्मा, कृष्ण चंद्र सिंह और विनीत नारायण के माध्यम से ईडी निदेशक के कार्यकाल के विस्तार को चुनौती देते हुए दायर किया है।

याचिकाओं में केंद्र द्वारा 17 नवंबर, 2021 को ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक और वर्ष बढ़ाने के आदेश और केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अधिनियम 2021 को चुनौती दी गई है, जो प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के 5 वर्ष तक के कार्यकाल के विस्तार की अनुमति देता है।

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कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. सिंघवी ने प्रस्तुत किया कि संशोधन केंद्र सरकार को ईडी निदेशक को 5 साल तक का वार्षिक विस्तार देने की अनुमति देता है, जो अधिकारी को सरकार के विवेक पर रखता है और पद की स्वतंत्रता से समझौता करता है। सिंघवी ने कहा कि कॉमन कॉज बनाम भारत संघ के फैसले में, शीर्ष अदालत ने पिछले साल निर्देश दिया था कि मिश्रा को और विस्तार नहीं दिया जा सकता है।

एक वकील ने बताया कि मिश्रा ने ईडी निदेशक के रूप में 4 साल पूरे कर लिए हैं। एक अन्य वकील ने तर्क दिया कि ईडी निदेशक की 2017-2020 से अपनी अचल संपत्ति रिटर्न अपलोड करने में विफलता और सतर्कता नियम और आधिकारिक ज्ञापन में कहा गया है कि अगर रिटर्न अपलोड नहीं किया जाता है तो शीर्ष पद के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी।

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ठाकुर की ओर से अधिवक्ता शशांक रत्नू और वरुण ठाकुर पेश हुए, जहां कांग्रेस नेता ने मिश्रा को दिए गए विस्तार के साथ-साथ सतर्कता आयोग अधिनियम में अध्यादेश के माध्यम से लाए गए संशोधनों को चुनौती दी थी। वकील ने तर्क दिया कि विस्तार आदेश और संशोधन का प्रासंगिक बिंदु शीर्ष अदालत के अपने फैसले और वीसी अधिनियम की आत्मा के विपरीत है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि मिश्रा को दिया गया विस्तार ईडी निदेशक के कार्यकाल के लिए 5 साल तक के विस्तार की अनुमति देने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश जारी कर शीर्ष अदालत के निर्देशों का घोर उल्लंघन है।

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