नई दिल्ली: केरल में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) की प्रचंड जीत के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने कवायद तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद केरल के अगले मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
बैठक में शामिल दिग्गज नेता
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद के चयन के लिए बुलाई गई इस बैठक में कांग्रेस के शीर्ष नेता मंथन कर रहे हैं। बैठक में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- राहुल गांधी: लोकसभा में विपक्ष के नेता।
- मल्लिकार्जुन खरगे: कांग्रेस अध्यक्ष।
- पर्यवेक्षक: मुकुल वासनिक और अजय माकन।
- दीपा दासमुंशी: केरल की पार्टी प्रभारी और महासचिव।
तीन दावेदार, एक कुर्सी: खरगे के आवास पहुंचे नेता
केरल कांग्रेस के तीन सबसे कद्दावर चेहरे, जो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं, वे भी इस बैठक का हिस्सा बनने के लिए खरगे के निवास पर पहुंच चुके हैं:
- वी.डी. सतीशन: निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता, जिन्हें चुनाव प्रचार का मुख्य चेहरा माना गया।
- रमेश चेन्निथला: पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिनका लंबा प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव उनके पक्ष में जाता है।
- के.सी. वेणुगोपाल: कांग्रेस महासचिव (संगठन), जिनका नाम हाल के दिनों में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरा है।
खेमेबाजी और शक्ति प्रदर्शन के बीच चुनौती
यह बैठक एक ऐसे समय में हो रही है जब केरल में पार्टी के भीतर गुटबाजी सतह पर आ गई है।
- सतीशन समर्थक: राज्य के कई हिस्सों में वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर समर्थकों ने प्रदर्शन किया है।
- पोस्टर वार: हाल ही में के.सी. वेणुगोपाल के खिलाफ कुछ इलाकों में पोस्टर भी देखे गए थे, जिससे पार्टी आलाकमान की चिंता बढ़ गई है।
पार्टी की रणनीति: सर्वसम्मति पर जोर
कांग्रेस नेतृत्व का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा ‘बीच का रास्ता’ या फॉर्मूला निकालना है जिससे पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के सार्वजनिक विभाजन या असंतोष को रोका जा सके। हाईकमान चाहता है कि फैसला सर्वसम्मति से हो ताकि सरकार के गठन के साथ ही जनता को एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
विधायक दल की राय और दिल्ली में हो रहे इस मंथन के बीच, केरल की राजनीति के लिए अगले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। अब देखना यह होगा कि अनुभव, युवा जोश और संगठनात्मक पकड़ में से आलाकमान किसे प्राथमिकता देता है।

