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Monday, May 11, 2026

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कर्नाटक: “कोई कुर्सी नहीं हिल रही है” – पीएम मोदी के आरोपों पर डीके शिवकुमार का पलटवार

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रायचूर/बंगलूरू: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर ‘नेतृत्व परिवर्तन’ और ‘सत्ता संघर्ष’ की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस सरकार में आंतरिक कलह के दावों पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से साफ इनकार किया है।

डीके शिवकुमार का स्पष्टीकरण: सरकार पूरी तरह स्थिर

रायचूर जिले के लिंगसुगुर में मीडिया से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार मजबूती से काम कर रही है और पदों को लेकर कोई विवाद नहीं है।

“कर्नाटक में कोई कुर्सी नहीं हिल रही है। सभी कुर्सियां स्थिर हैं। मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री किस संदर्भ में यह बात कह रहे हैं, लेकिन हमारी सरकार में कोई अस्थिरता नहीं है।” — डीके शिवकुमार, उपमुख्यमंत्री

पीएम मोदी का हमला: कांग्रेस को बताया ‘परजीवी’

इससे पहले बंगलूरू में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर कड़ा प्रहार किया था। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की सरकार जनता के विकास के बजाय आपसी कुर्सी की लड़ाई में व्यस्त है।

प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • नेतृत्व संकट: राज्य सरकार पिछले तीन सालों से आपसी विवादों और नेतृत्व की अनिश्चितता में उलझी हुई है।
  • विफल वादे: कांग्रेस जनता से किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है क्योंकि नेता केवल सत्ता के बंटवारे में व्यस्त हैं।
  • कड़ा प्रहार: पीएम मोदी ने कांग्रेस को ‘परजीवी पार्टी’ करार देते हुए कहा कि यह सरकार जनता की समस्याओं को सुलझाने के प्रति गंभीर नहीं है।

सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार: सत्ता समझौते की अटकलें

प्रधानमंत्री के इस हमले ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर कथित ‘पावर-शेयरिंग’ समझौते की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है। गौरतलब है कि 2023 में जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के चयन के दौरान सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी खींचतान चली थी।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि आलाकमान ने कार्यकाल के ढाई-ढाई साल के बंटवारे का अनौपचारिक फॉर्मूला तय किया था, जिसके तहत कार्यकाल के दूसरे हिस्से में नेतृत्व डीके शिवकुमार को सौंपा जा सकता है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व और खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सार्वजनिक तौर पर कभी भी ऐसे किसी समझौते की पुष्टि नहीं की है।

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