नौकरी का लालच, फेक टास्क और हनीट्रैप की साजिश; सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय किए गए स्लीपर सेल
नई दिल्ली: भारतीय सेना में ‘अग्निपथ’ योजना के तहत अपनी चार साल की सेवा पूरी करने के बाद नागरिक जीवन में लौट रहे पूर्व सैनिकों को लेकर सुरक्षा तंत्र में भारी हलचल है। केंद्रीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, सेवा से मुक्त होकर घर लौट रहे 75 प्रतिशत अग्निवीरों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ (ISI) ने अपनी कुटिल नजरें गड़ा दी हैं। सीमा पार से संचालित होने वाली यह एजेंसी इन प्रशिक्षित युवाओं को गुमराह करके देश विरोधी गतिविधियों में घसीटने की खतरनाक साजिश रच रही है।
खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पड़ोसी मुल्क की एजेंसी मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन पूर्व जवानों से संपर्क साधने की जुगत में लगी है। इसके अतिरिक्त, संवेदनशील सीमावर्ती जिलों और राज्यों में आईएसआई ने अपने स्लीपर सेल को विशेष रूप से सक्रिय कर दिया है, ताकि वे सैन्य पृष्ठभूमि वाले युवाओं की पहचान कर उन्हें अपने जाल में फंसा सकें।
साजिश के तहत पूर्व अग्निवीरों को मोटी कमाई वाली नौकरियों का लालच देने, आकर्षक वेतन पर आधारित छोटे-मोटे टास्क सौंपने और सुनियोजित तरीके से हनीट्रैप में उलझाने का खाका तैयार किया गया है। चूंकि इन जवानों के पास सैन्य प्रशिक्षण और आंतरिक कार्यप्रणालियों की बुनियादी समझ होती है, इसलिए विदेशी एजेंसी इनका इस्तेमाल संवेदनशील जानकारियां हासिल करने या सीमा पार तस्करी के नेटवर्क को मजबूती देने के लिए करना चाहती है।
केंद्रीय एजेंसियों ने इन इनपुट्स के बाद तीनों सेनाओं और स्थानीय पुलिस प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, चार साल का कार्यकाल पूरा कर नागरिक जीवन में लौटने वाले युवाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाने और उनके त्वरित पुनर्वास व रोजगार की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दुश्मन देश की इस नापाक साजिश को पूरी तरह नाकाम किया जा सके।

