नई दिल्ली: भारत को स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ‘मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट’ कार्यक्रम के दौरान आईसीएमआर ने देश का पहला संरचित (Structured) ‘इनोवेटर-इंडस्ट्री’ प्लेटफॉर्म आधिकारिक रूप से लॉन्च किया।
इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों में विकसित की जा रही अत्याधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को सीधे उद्योग जगत (Industries) से जोड़ना है, ताकि स्वदेशी समाधानों को जल्द से जल्द आम जनता तक पहुँचाया जा सके।
“अब समाधानों का वैश्विक स्रोत बन रहा है भारत” — केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की सराहना की। उन्होंने कहा:
“भारत अब केवल विदेशी स्वास्थ्य तकनीकों और चिकित्सा उपकरणों का उपभोक्ता (Consumer) नहीं रह गया है। आज हमारा देश दुनिया के लिए किफायती, सुलभ और नवोन्मेषी (Innovative) स्वास्थ्य समाधानों का एक मजबूत वैश्विक स्रोत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
उद्योग जगत को हस्तांतरित की गईं 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियां
इस कार्यक्रम के दौरान एक मील का पत्थर स्थापित करते हुए आईसीएमआर ने देश के प्रमुख उद्योग भागीदारों को 41 महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियां (Public Health Technologies) व्यावसायिक उत्पादन के लिए हस्तांतरित (Transfer) कीं।
इन तकनीकों के हस्तांतरण से चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है:
- बायोमेडिकल समाधान: हस्तांतरित की गई तकनीकों में जीवन रक्षक टीके (Vaccines), आधुनिक डायग्नोस्टिक किट्स, किफायती मेडिकल डिवाइसेज और कई बायोमेडिकल समाधान शामिल हैं।
- ऐतिहासिक कदम: भारत में पहली बार चिकित्सा अनुसंधान को गति देने के लिए निष्क्रिय (Inactivated) केएफडी (Kyasanur Forest Disease) और चांदीपुरा वायरस के बायोमटेरियल आधिकारिक तौर पर उद्योग क्षेत्र के शीर्ष भागीदारों को सौंपे गए। इस कदम से देश में इन घातक वायरसों के खिलाफ स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और सुरक्षात्मक अनुसंधान को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
प्रयोगशालाओं से निकलकर आम जनता तक पहुंचेगा स्वदेशी शोध
कार्यक्रम के दौरान नीति आयोग और आईसीएमआर के शीर्ष अधिकारियों ने देश के चिकित्सा भविष्य का रोडमैप साझा किया:
- वैश्विक नेतृत्व की क्षमता: नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने रेखांकित किया कि भारतीय वैज्ञानिकों में स्वास्थ्य तकनीकों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की पूरी क्षमता और वैज्ञानिक दक्षता मौजूद है।
- प्रक्रिया में आएगी तेजी: आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि यह नया प्लेटफॉर्म स्वदेशी अनुसंधान को प्रयोगशालाओं की फाइलों से बाहर निकालकर सीधे बाजार और अस्पतालों तक पहुंचाने की गति को कई गुना बढ़ा देगा।
महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स जारी:
इस ऐतिहासिक सम्मेलन के दौरान देश में चिकित्सा पेटेंट की वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाली ‘इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट’ (Indian Biomedical Patent Landscape Report) और तकनीकी प्रगति से जुड़ी ‘टेक्नोलॉजी कंपेंडियम’ (Technology Compendium) का भी विमोचन किया गया।

