नई दिल्ली: भारत और म्यांमार ने अपनी साझा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व अभेद्य बनाने के लिए विधिक सहयोग बढ़ाने का एक बड़ा निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच नई दिल्ली में आयोजित 23वीं राष्ट्रीय स्तर की बैठक (23rd National Level Meeting) में खुफिया जानकारी (Intelligence) साझा करने, सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त अभियान (Joint Operations) चलाने और सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता को बढ़ाने पर विधिक सहमति बनी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा बैठक के समापन के बाद जारी आधिकारिक विधिक बयान के अनुसार, यह अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक 7-8 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें सीमा प्रबंधन से जुड़े कई तकनीकी व रणनीतिक मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ।
1. संप्रभुता का सम्मान: भारत विरोधी गतिविधियों पर म्यांमार का विधिक भरोसा
इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने भारत-म्यांमार सीमा की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और विद्रोही गुटों की गतिविधियों की व्यापक समीक्षा की:
- साझा प्राथमिकता: दोनों पक्षों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पूर्ण शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना दोनों पड़ोसी देशों की साझा रणनीतिक प्राथमिकता है।
- जमीन के दुरुपयोग पर रोक: बैठक में एक महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत पर सहमति बनी कि किसी भी देश की संप्रभु भूमि (Sovereign Land) का इस्तेमाल दूसरे देश की सुरक्षा व अखंडता के खिलाफ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- म्यांमार का आश्वासन: म्यांमार के प्रतिनिधिमंडल ने भारत को स्पष्ट विधिक भरोसा दिलाया कि म्यांमार की धरती का उपयोग किसी भी रूप में भारत विरोधी उग्रवादी गतिविधियों या कैंपों के संचालन के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
2. रणनीतिक और ढांचागत परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर जोर
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के लिए बैठक में दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की विधिक प्रगति की समीक्षा की गई:
भारत-म्यांमार रणनीतिक अवसंरचना⎩⎨
⎧1. कालादान मल्टी-मोडल प्रोजेक्ट:2. त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना:3. कूटनीतिक व आर्थिक लाभ:कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना (Kaladan Multi-Modetal Project) को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता।भारत-म्यांमार-थाईलैंड (IMT) त्रिपक्षीय राजमार्ग के निर्माण कार्य में तेजी लाने पर विधिक सहमति।इन परियोजनाओं के सक्रिय होने से दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
3. गृह मंत्रालय की पैनी नजर
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की सुरक्षा के लिहाज से म्यांमार के साथ लगती खुली और दुर्गम सीमा का प्रबंधन बेहद चुनौतीपूर्ण है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस 23वीं राष्ट्रीय स्तर की बैठक में लिए गए विधिक फैसले दोनों देशों के जमीनी कमांडरों के बीच वास्तविक समय (Real-Time) में समन्वय स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होंगे। इससे सीमा पार से होने वाली हथियारों व ड्रग्स की तस्करी और अवैध घुसपैठ पर प्रभावी विधिक रोक लगाई जा सकेगी।

