मुंबई: मुंबई के खार इलाके से एक बेहद कीमती एसयूवी (SUV) की चोरी का सनसनीखेज विधिक व तकनीकी मामला सामने आया है। खार पुलिस ने आधुनिक कोडिंग और ब्लूटूथ स्कैनर तकनीक के जरिए लग्जरी गाड़ियां चुराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की विशेष विधिक टीम ने महज एक सप्ताह के भीतर त्वरित कार्रवाई करते हुए गुजरात के राजकोट से दो शातिर अपराधियों को विधिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई टोयोटा फॉर्च्यूनर (Toyota Fortuner) कार, चाबी का डिजिटल सिग्नल कॉपी करने वाला ब्लूटूथ स्कैनर डिवाइस और दो महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद फॉर्च्यूनर कार की विधिक व बाजार कीमत करीब 45 लाख रुपये आंकी गई है। स्थानीय अदालत ने दोनों आरोपियों को 5 जुलाई 2026 तक पुलिस विधिक हिरासत (Police Custody) में भेज दिया है।
1. गिरफ्तार आरोपियों की विधिक पहचान और क्रिमिनल हिस्ट्री
पकड़े गए दोनों आरोपी तकनीकी रूप से बेहद सक्षम हैं और लंबे समय से पुलिस की रडार पर थे:
- दीप रमणीकभाई आघेर (उम्र 28 वर्ष): निवासी – राजकोट, गुजरात। दीप के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में पांच गंभीर आपराधिक मामले पहले से ही विधिक रूप से दर्ज हैं। यह कोडिंग और सुरक्षा तंत्र को भेदने का विशेषज्ञ है।
- राहुलभाई भरतभाई घियाल (उम्र 29 वर्ष): निवासी – राजकोट, गुजरात। राहुल भी गुजरात के एक अन्य विधिक मामले में लंबे समय से ‘वॉन्टेड’ (वांछित) चल रहा था।
2. कार चोरी का हाईटेक विधिक व तकनीकी ‘मोडस ऑपेरेंडी’ (Modus Operandi)
इस गिरोह ने कार चुराने के लिए किसी पारंपरिक चाबी या लॉक-ब्रेकर का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि डिजिटल विधा को अपनाया:
डिजिटल चोरी की विधिक व तकनीकी कड़ियां⎩⎨
⎧1. सिग्नल क्लोनिंग:2. कोडिंग बायपास:3. पहचान छुपाना:4. रूट मैप:आरोपियों ने ब्लूटूथ स्कैनर डिवाइस से फॉर्च्यूनर की मूल स्मार्ट-की (Smart Key) के सिग्नल को कॉपी किया।सिग्नल के जरिए कार के अत्याधुनिक विधिक सुरक्षा सिस्टम (इमोबिलाइजर) को निष्क्रिय कर दिया गया।पुलिस और टोल नाकों को भ्रमित करने के लिए वाहन पर तुरंत एक **फर्जी नंबर प्लेट** लगा दी गई।आरोपी कार लेकर मुंबई के दहिसर टोल नाके को पार कर सीधे गुजरात की सीमा में प्रवेश कर गए।
3. सीसीटीवी और पहचान चिह्नों (Identification Marks) से खुली पोल
वारदात के बाद खार पुलिस के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज और डंप डेटा के तकनीकी साक्ष्यों की गहन पड़ताल की। भले ही आरोपियों ने कार की नंबर प्लेट बदल दी थी, लेकिन पुलिस ने वाहन पर मौजूद कुछ बेहद विशिष्ट भौतिक पहचान चिह्नों (Unique Marks) को ट्रैक कर लिया। इसी तकनीकी सुराग के आधार पर मुंबई पुलिस ने आरोपियों की लाइव लोकेशन राजकोट में ट्रेस की।
4. नवसारी के चिखली से बरामद हुई 45 लाख की फॉर्च्यूनर
आरोपियों की विधिक घेराबंदी करने के लिए खार पुलिस की एक टीम तुरंत गुजरात रवाना हुई और राजकोट स्थानीय पुलिस के साथ विधिक समन्वय स्थापित कर दोनों को एक जाल बिछाकर दबोच लिया।
विधिक पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कुबूल किया कि पकड़े जाने के डर से उन्होंने चोरी की गई फॉर्च्यूनर को राजकोट से करीब 300 किलोमीटर दूर नवसारी जिले के चिखली क्षेत्र में एक सुनसान जगह पर छिपाकर रखा है। इसके बाद खार पुलिस ने राजकोट की स्थानीय अदालत में कानूनी अर्जी दाखिल कर ट्रांजिट रिमांड (Transit Remand) हासिल किया और चिखली से वाहन को विधिक रूप से जब्त कर मुंबई वापस ले आई। जांच में पता चला है कि गिरोह का एक सदस्य कोडिंग और चेसिस नंबर बदलने में माहिर है, जिससे वे चुराए गए वाहनों को नए विधिक दस्तावेज बनाकर बाजार में बेच देते थे।

