रांची/कोलकाता: झारखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नेतरहाट इको-सेंसिटिव जोन (Eco-Sensitive Zone) और पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve) के संरक्षित क्षेत्रों में होटलों और रिसॉर्ट्स के धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण का मामला अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहुंच गया है। एनजीटी ने इस मामले को पर्यावरण के लिए एक बेहद गंभीर चिंता मानते हुए इसका स्वतः संज्ञान लिया है और संबंधित उच्चाधिकारियों व विभागों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
यह बड़ी कार्रवाई पर्यावरण कार्यकर्ता गोविंद पाठक द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्रीय पीठ (Eastern Bench) ने की है। अधिकरण ने याचिका को विचारणीय (Admissible) पाते हुए मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को मुकर्रर की है।
पलामू वन्यजीव अभयारण्य के भीतर भी बन रहे हैं रिजॉर्ट
गोविंद पाठक द्वारा दायर याचिका में राज्य के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव और वन क्षेत्रों को लेकर कई चौंकाने वाले और गंभीर दावे किए गए हैं:
- 59 अवैध होटल और रिसॉर्ट: याचिका के अनुसार, पर्यावरण नियमों और तय मानदंडों को ताक पर रखकर पूरे इको-सेंसिटिव जोन में लगभग 59 होटलों और कमर्शियल रिसॉर्ट्स का अवैध निर्माण किया जा रहा है।
- अभयारण्य के अंदर निर्माण: सबसे हैरान करने वाला दावा यह है कि इन 59 निर्माणों में से दो बड़े रिसॉर्ट कथित तौर पर पलामू वन्यजीव अभयारण्य (Palamu Wildlife Sanctuary) की मुख्य सीमा के भीतर बनाए जा रहे हैं।
- मास्टर प्लान का अभाव: याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र और राज्य सरकार की अधिसूचनाओं के बावजूद, इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए अब तक कोई ‘जोनल मास्टर प्लान’ (Zonal Master Plan) तैयार नहीं किया गया है और न ही अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए किसी निगरानी समिति का गठन किया गया है।
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से पलामू टाइगर रिजर्व, बेतला राष्ट्रीय उद्यान (Betla National Park), नेतरहाट पहाड़ियों और महुआडांड़ वुल्फ सैंक्चुअरी (Mahuadanr Wolf Sanctuary) के आस-पास चल रही अनियंत्रित वाणिज्यिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
झारखंड के मुख्य सचिव और NTCA से एक महीने में मांगा जवाब
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य) और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की पीठ ने 25 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान देश और राज्य की शीर्ष पर्यावरण व प्रशासनिक इकाइयों को कटघरे में खड़ा किया है।
एनजीटी ने निम्नलिखित अधिकारियों और संस्थाओं को नोटिस जारी कर एक महीने के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है:
- झारखंड सरकार के मुख्य सचिव (Chief Secretary)
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
- पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक (Field Director)
- अन्य संबंधित स्थानीय और वन विभाग के अधिकारी
याचिकाकर्ता की मांग: अवैध निर्माणों को तुरंत ध्वस्त किया जाए
पर्यावरण कार्यकर्ता गोविंद पाठक ने एनजीटी की पीठ से गुहार लगाई है कि इन प्राचीन और संवेदनशील जंगलों को कंक्रीट के जंगल में तब्दील होने से बचाने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाए जाएं।
उन्होंने अधिकरण से मांग की है कि वर्तमान में चल रहे सभी अवैध व्यावसायिक निर्माणों पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध (Stay) लगाया जाए। साथ ही, जो संरचनाएं वन नियमों का उल्लंघन कर पहले ही खड़ी की जा चुकी हैं, उन्हें ध्वस्त (Demolish) करने का आदेश दिया जाए। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

