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Thursday, July 16, 2026

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नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से, नीट धांधली और परिसीमन पर टकराव के आसार

आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। एक तरफ जहां विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को चौतरफा घेरने की जोरदार रणनीति बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के रणनीतिकार कुछ ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराकर नया इतिहास रचने की तैयारी में हैं। इस बीच राजनीतिक दलों के साथ-साथ अन्य संगठनों ने भी संसद घेराव का एलान कर दिया है, जिससे राजधानी में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

इन बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष

विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए कई संवेदनशील मुद्दों की सूची तैयार की है। मुख्य रूप से नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक का मामला, ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर विवाद, अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी, मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा, बेरोजगारी, बढ़ती मंहगाई और ई-20 (एथेनॉल) ईंधन नीति को लेकर जनता में बढ़ती नाराजगी जैसे मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि केंद्र सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ का प्रस्ताव, परिसीमन या कोई नया संविधान संशोधन विधेयक सदन में लाती है, तो समूचा विपक्ष एकजुट होकर उसका कड़ा विरोध करेगा।

इतिहास रचने की तैयारी में सरकार, आंकड़ों का खेल दिलचस्प

दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण और दूरगामी विधायी प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के संकेत दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार सदन में 130वां संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो देश में परिसीमन का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे सितंबर 2023 में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए पारित किया गया ऐतिहासिक विधेयक जमीनी स्तर पर प्रभावी हो सकेगा। इसके साथ ही सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ के अपने प्रस्ताव और एफसीआरए (FCRA) विधेयक को भी आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

इस ऐतिहासिक कदम को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार को 543 सदस्यीय लोकसभा में कम से कम 360 सदस्यों (बशीरहाट, नौगांव और शिलांग की सीटें रिक्त होने के बाद) के समर्थन की आवश्यकता होगी। वर्तमान में भाजपा और एनडीए खेमे के पास मूल रूप से 298 सदस्यों की संख्या थी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी टूट के चलते उसके 20 सांसदों को सदन में अलग बैठने की जगह मिलना तय माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, उद्धव ठाकरे गुट के भी कुछ सांसद टूटकर एनडीए के पाले में आ चुके हैं। भाजपा सूत्रों का दावा है कि एनडीए का यह आंकड़ा अब 345 को पार कर चुका है।

20 जुलाई को दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की आशंका, पुलिस अलर्ट

सदन के भीतर मचे घमासान के बीच सड़कों पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने देश के युवाओं से 20 जुलाई को बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है। इसके साथ ही, लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुग पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हैं, जिनसे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव समेत कई दिग्गज नेता मुलाकात कर चुके हैं।

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि यह आंदोलन युवाओं के बीच तेजी से जोर पकड़ रहा है। पूरी संभावना है कि 20 जुलाई को भारी संख्या में युवा दिल्ली की सीमाओं पर जुट सकते हैं और संसद मार्च के लिए विभिन्न रास्तों का रुख कर सकते हैं। इस इनपुट के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार पूरी तरह सतर्क हैं। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है और पड़ोसी राज्यों की पुलिस से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

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