28.8 C
Mumbai
Friday, July 3, 2026

आपका भरोसा ही, हमारी विश्वसनीयता !

हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का हैरतअंगेज रेस्क्यू: INS त्रिकंद ने समुद्री लुटेरों के चंगुल से छुड़ाया विदेशी मालवाहक जहाज, सुरक्षित बचाए 21 क्रू मेंबर्स

नई दिल्ली: वैश्विक समुद्री सीमाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर भारतीय नौसेना (Indian Navy) का दबदबा और विधिक सुरक्षा पराक्रम एक बार फिर दुनिया के सामने आया है। हिंद महासागर और भूमध्य सागर जैसे अत्यंत संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में मिशन-तैनात भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद (INS Trikand) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री डकैती (Piracy) के प्रयास को विधिक व सैन्य मुस्तैदी से विफल कर दिया है।

नौसेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइन्स के ध्वज वाले मालवाहक पोत एमवी गोल्डन आर्सेनल (MV Golden Arsenal) पर हुए समुद्री लुटेरों के हमले का तुरंत जवाब देकर जहाज और उसके चालक दल को सुरक्षित बचा लिया है।

1. जिबूती से 300 मील दूर समुद्री लुटेरों ने बोला था धावा

इस हाई-सी रेस्क्यू ऑपरेशन की विधिक व सैन्य क्रोनोलॉजी इस प्रकार है:

  • संकट का संदेश: यमन के अदन से आ रहे व्यापारिक पोत ‘एमवी गोल्डन आर्सेनल’ पर जिबूती से लगभग 300 समुद्री मील पूर्व-उत्तरपूर्व में समुद्री लुटेरों ने अचानक हमला कर दिया।
  • IFC-IOR का विधिक समन्वय: जहाज द्वारा भेजे गए संकटकालीन संदेश को ‘सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र’ (IFC-IOR) ने तुरंत डिकोड किया। इसके बाद कूटनीतिक व सैन्य समन्वय स्थापित करते हुए क्षेत्र में गश्त कर रहे युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद को तत्काल मालवाहक पोत की ओर बढ़ने का विधिक निर्देश दिया गया।

2. जहाज के ‘सिटाडेल’ (गढ़) में छिपे थे भारतीय सहित 21 क्रू मेंबर

जहाज की स्थिति और रेस्क्यू का विवरण ​चालक दल की संख्या:सुरक्षा रणनीति:जहाज को क्षति:​पोत पर  भारतीय नागरिकों समेत कुल 21 चालक दल के सदस्य सवार थे।लुटेरों को देखकर चालक दल के सदस्यों ने जहाज के सुरक्षित विधिक क्षेत्र ’गढ़’ (Citadel) में शरण ली।हमले के दौरान लुटेरों की गोलाबारी से पोत के पुल (Bridge) के ऊपरी ढांचे और डिब्बों को नुकसान पहुंचा।​

3. 2 जुलाई की सुबह INS त्रिकंद के मरीन कमांडोज ने संभाला मोर्चा
2 जुलाई 2026 की सुबह आईएनएस त्रिकंद के जांबाज विधिक सुरक्षा दल (मरीन कमांडोज) ने ‘एमवी गोल्डन आर्सेनल’ पर कदम रखा (Boarding Operation)। भारतीय नौसेना के जवानों ने पूरे जहाज को अपने विधिक नियंत्रण में लेकर उसकी सघन तलाशी शुरू की। गहन तलाशी अभियान के बाद पोत पर कोई भी संदिग्ध या छुपा हुआ समुद्री डाकू नहीं मिला (संभवतः नौसेना के युद्धपोत को आते देख लुटेरे भाग खड़े हुए)। इसके बाद ‘गढ़’ में बंद चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

4. आसमान से P-8I विमान ने रखी पैनी नजर

इस डकैती-विरोधी विधिक अभियान को त्रिकोणीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना ने अपने सबसे आधुनिक समुद्री गश्ती विमान पी-8आई (P-8I Strategic Aircraft) को आसमान में तैनात किया था। पी-8आई ने पूरे समुद्री क्षेत्र में हवाई निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक टोही (Reconnaissance) की, जिससे समुद्र में दूर-दूर तक की गतिविधियों की लाइव मैपिंग हो सकी और विधिक सुरक्षा घेरे को और अभेद्य बनाया जा सका।

फिलहाल भारतीय नौसेना के तकनीकी कर्मी और इंजीनियर मालवाहक पोत के विधिक व ढांचागत नुकसान का आकलन कर रहे हैं, ताकि उसे सुरक्षित रूप से उसकी गंतव्य विधिक बंदरगाह की ओर रवाना किया जा सके।

ताजा खबर - (Latest News)

Related news

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here