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Wednesday, July 1, 2026

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गुजरात सरकार की अनूठी पहल: बच्चों के लिए शुरू हुआ ‘हेल्थ पासपोर्ट’, जन्म से 18 साल तक का सारा मेडिकल रिकॉर्ड रहेगा एक जगह

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने राज्य के बच्चों और किशोर-किशोरियों को बेहतर और अधिक व्यवस्थित चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक ऐतिहासिक विधिक व स्वास्थ्य पहल की शुरुआत की है। राज्य में ‘स्कूल हेल्थ-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (SH-RBSK) के अंतर्गत अब जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का एक विशेष ‘हेल्थ पासपोर्ट’ (Health Passport) तैयार किया जाएगा।

इस राज्यव्यापी दूरगामी कार्यक्रम का आधिकारिक विधिक शुभारंभ 27 जून 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की गरिमामयी मौजूदगी में किया। इस पासपोर्ट के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार और फॉलो-अप का पूरा इतिहास एक ही विधिक दस्तावेज में समेकित रहेगा।

1. हर साल 1.89 करोड़ बच्चों की होगी विधिक स्क्रीनिंग

गुजरात सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशाल स्वास्थ्य अभियान की विधिक रूपरेखा इस प्रकार है:

  • विशाल नेटवर्क: राज्य भर में कुल 992 मोबाइल हेल्थ टीमें (Mobile Health Teams) इस कार्य में चौबीसों घंटे तैनात की गई हैं।
  • वार्षिक लक्ष्य: ये टीमें हर वर्ष राज्य के करीब 1.89 करोड़ बच्चों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण (Health Screening) करेंगी।
  • आसान उपलब्धता: अभिभावकों को यह पासपोर्ट बनवाने के लिए किसी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही कोई अतिरिक्त विधिक दस्तावेज जमा करना होगा। मोबाइल हेल्थ टीमें स्वयं आंगनवाड़ी, सरकारी व निजी स्कूल, मदरसा, गुरुकुल और स्पेशल स्कूलों में जाकर जांच करेंगी और मौके पर ही डेटा डिजिटल पोर्टल पर दर्ज कर हेल्थ पासपोर्ट जारी कर देंगी।

2.’4D’ श्रेणियों सहित पासपोर्ट में दर्ज होंगी ये महत्वपूर्ण जानकारियां

यह हेल्थ पासपोर्ट केवल एक सामान्य पर्चा नहीं, बल्कि बच्चे की व्यक्तिगत मेडिकल हिस्ट्री का एक समेकित विधिक दस्तावेज होगा। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विवरण दर्ज रहेंगे:

  • 4D श्रेणियां: जन्मजात दोष (Defects at Birth), बीमारियां (Diseases), पोषण की कमी (Deficiencies) और विकास में देरी या दिव्यांगता (Developmental Delays/Disabilities)।
  • अतिरिक्त परामर्श: बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास ग्राफ, पोषण स्तर, रेफरल सेवाएं, डॉक्टरों द्वारा दिए गए विशेष स्वास्थ्य व पोषण संबंधी सुझाव, लाइफस्टाइल एडवाइस और सभी महत्वपूर्ण इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर।

3. डिजिटल पोर्टल से जुड़ाव: खोने पर तुरंत मिलेगा नया पासपोर्ट

प्रशासनिक और विधिक दृष्टिकोण से इस व्यवस्था को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाया गया है:

  • हाइब्रिड मॉडल: हेल्थ पासपोर्ट की एक भौतिक (Physical) प्रति अभिभावकों के सुरक्षित रख-रखाव के लिए उनके पास रहेगी, जबकि इसका पूरा डेटा बैकअप SH-RBSK के केंद्रीय डिजिटल पोर्टल से विधिक रूप से लिंक रहेगा।
  • डुप्लिकेट की सुविधा: यदि किसी कारणवश यह भौतिक पासपोर्ट खो जाता है या फट जाता है, तो डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के आधार पर मोबाइल हेल्थ टीम के माध्यम से तुरंत नया (डुप्लिकेट) हेल्थ पासपोर्ट प्राप्त किया जा सकेगा। इससे बच्चों के इलाज की निरंतरता में कोई विधिक या व्यावहारिक बाधा नहीं आएगी।

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