नई दिल्ली: देश भर में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की लगातार उठ रही मांगों के बीच केंद्र सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक अहम बयान में साफ किया है कि वर्तमान में केंद्र सरकार या केंद्रीय कैबिनेट के पास ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन (Under Consideration) नहीं है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध लोगों की ओर से इस तरह की मांगें लगातार उठाई जाती रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर यह मामला अभी तक सरकार के निर्णय के दायरे में नहीं पहुंचा है।
राज्यों के अपने कानून और हालात जिम्मेदार
केंद्रीय कानून मंत्री ने इस संवेदनशील विषय के कानूनी पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि गोहत्या से जुड़े कानून भारत के अलग-अलग राज्यों में पूरी तरह भिन्न हैं। प्रत्येक राज्य सरकार अपनी स्थानीय भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से इस पर फैसले लेती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई संगठन सांसदों और मंत्रियों को ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रव्यापी स्तर पर गोहत्या पर रोक लगाने की वकालत करते रहते हैं, लेकिन जब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव कैबिनेट के पटल पर नहीं आता, तब तक इस पर केंद्र की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सकता।
सोशल मीडिया की चर्चाओं और निर्णय प्रक्रिया पर दी सफाई
अर्जुन राम मेघवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह मुद्दा अक्सर आम जनमानस के बीच चर्चा का केंद्र बना रहता है और सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बड़ी बहसें होती हैं। कई संगठन और धार्मिक संस्थाएं इस दिशा में अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर किसी भी प्रकार की आधिकारिक निर्णय प्रक्रिया (Decision Process) शुरू नहीं की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में कभी भी ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचार या फैसले के स्तर तक पहुंचता है, तो इसकी आधिकारिक जानकारी देश के सामने साझा की जाएगी।

