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Sunday, May 31, 2026

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मणिपुर में उग्रवादियों का काल बनेगी CRPF की ‘कोबरा’ कमांडो फोर्स; गृह मंत्रालय ने दो बटालियनों की तैनाती को दी हरी झंडी

इम्फाल/नई दिल्ली: मणिपुर में पिछले तीन सालों से जारी उग्रवाद और जातीय हिंसा पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा सैन्य कदम उठाया है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष एंटी-नक्सल और जंगल वॉरफेयर यूनिट ‘कोबरा’ (CoBRA – Commando Battalion for Resolute Action) को अब मणिपुर के जंगलों और पहाड़ों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को नेस्तनाबूद करने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस-2 डिवीजन ने सीआरपीएफ के इस ऑपरेशनल प्रपोजल को मंजूरी देते हुए कोबरा की दो पूर्ण बटालियनों को मणिपुर के लिए रवाना कर दिया है।

असम और बंगाल से भेजी गईं बटालियनें; बनेगा संयुक्त कमान चक्र
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में असम और पश्चिम बंगाल में तैनात सीआरपीएफ कोबरा की एक-एक रणनीतिक बटालियन को तुरंत प्रभाव से मणिपुर शिफ्ट कर दिया गया है। देश के नक्सल प्रभावित राज्यों में माओवादियों की कमर तोड़ने के बाद, अब कोबरा कमांडो मणिपुर के भीतरी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मोर्चा संभालेंगे।

इस नई सुरक्षा प्लानिंग के तहत सेना (Indian Army), सीमा सुरक्षा बल (BSF), असम राइफल्स, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और स्थानीय मणिपुर पुलिस के बीच जमीनी समन्वय को बेहतर बनाकर बड़े पैमाने पर संयुक्त ऑपरेशन (Joint Operations) शुरू किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि 3 मई 2023 को मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और करीब 1500 लोग घायल हुए हैं।

FOB मॉडल से उग्रवादियों की दोतरफा घेराबंदी और ड्रग माफिया पर चोट
सुरक्षा बलों ने मणिपुर में नक्सलियों को हराने वाले सफल ‘फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस’ (FOB) मॉडल को लागू करने का फैसला किया है। रणनीति के तहत उग्रवादियों की दोतरफा घेराबंदी की जाएगी:

सप्लाई चेन पर प्रहार: भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में सेना और बीएसएफ कड़ा पहरा देकर म्यांमार से होने वाली हथियारों व घुसपैठियों की सप्लाई चेन को पूरी तरह काट देंगे। इससे ड्रग माफिया पर भी बड़ा प्रहार होगा।

आंतरिक क्षेत्रों में दबदबा: भीतरी इलाकों में सीआरपीएफ, कोबरा और लोकल पुलिस मिलकर कम-कम दूरी पर नए एफओबी स्थापित करेगी, जिससे उग्रवादियों को छिपने का कोई मौका नहीं मिलेगा और वे सरेंडर (आत्मसमर्पण) करने पर मजबूर हो जाएंगे।

इस बड़े ऑपरेशन को धार देने के लिए मणिपुर के हिंसाग्रस्त और संवेदनशील इलाकों में 300 से ज्यादा अत्याधुनिक बुलेटप्रूफ बख्तरबंद गाड़ियां भी तैनात की जा रही हैं।

1643 किमी लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग का काम तेज
सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई के साथ ही सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को स्थायी रूप से रोकने के लिए भारत-म्यांमार की 1643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ (Fेंसिंग) लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। वर्तमान में केवल 9.214 किलोमीटर क्षेत्र में ही पक्की फेंसिंग है, जबकि शेष हिस्सा खुला हुआ है।

केंद्र सरकार ने पिछले साल 30,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पूरी सीमा को कवर करने का प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसे अगले 10 वर्षों में पूरा किया जाएगा। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में हाइब्रिड निगरानी प्रणाली (HSS) के तहत अत्याधुनिक पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, और मणिपुर के मुख्य संवेदनशील हिस्सों में 20 किलोमीटर के दायरे में बाड़ लगाने के कार्य को त्वरित मंजूरी दे दी गई है।

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