नासिक: महाराष्ट्र के नासिक की एक स्थानीय अदालत ने जमीन के सौदे से जुड़े कथित धोखाधड़ी और काला जादू (Black Magic) के एक हाई-प्रोफाइल मामले में स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात की पत्नी कल्पना खरात को विधिक रूप से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है। अदालत ने इस मामले की विधिक समीक्षा करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की और कहा कि यह मूल रूप से एक दीवानी (Civil) विवाद का मामला है, जिसे जानबूझकर आपराधिक रंग देने का विधिक प्रयास किया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केदार जोगलेकर की अदालत ने कल्पना खरात की अग्रिम जमानत याचिका को विधिक मंजूरी देते हुए रेखांकित किया कि इस मामले को दर्ज कराने में दो दशक (22 वर्ष) से भी अधिक का असामान्य और अस्पष्टीकृत विलंब (Inordinate Delay) हुआ है।
- नासिक सत्र न्यायालय की मुख्य विधिक टिप्पणियाँ
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कल्पना खरात को राहत देते हुए अपने विधिक आदेश में निम्नलिखित मुख्य बिंदु दर्ज किए:
मामले में लंबी देरी: अदालत ने पाया कि कथित विवादित लेन-देन वर्ष 2004 में हुआ था, जबकि इसकी पहली सूचना (FIR) घटना के 22 साल बाद 7 अप्रैल 2026 को दर्ज कराई गई, जो इसकी विधिक प्रामाणिकता पर सवाल खड़े करती है।
भूमिका का अभाव: जांच रिकॉर्ड के अनुसार, कल्पना खरात जमीन के इस सौदे को लेकर हुई किसी भी प्रारंभिक बातचीत, बैठक या वित्तीय लेन-देन का सीधा हिस्सा नहीं थीं।
अपराध से दूरी: उन्होंने न तो कभी विवादित कृषि भूमि का दौरा किया और न ही शिकायतकर्ता या उसके परिवार को किसी भी तरह का प्रलोभन, आश्वासन या विधिक रूप से धमकी दी।
हिरासत की कोई आवश्यकता नहीं: न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि आरोपों की प्रकृति ऐसी बिल्कुल भी नहीं है कि इसके लिए महिला आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ (Custodial Interrogation) की जाए या उनसे किसी प्रकार की विधिक जब्ती की आवश्यकता हो।
क्या था पूरा विवाद और अंधविश्वास का विधिक ताना-बाना?
यह पूरा आपराधिक मामला सिन्नर थाने में शिवराम एकनाथ माली की लिखित शिकायत पर दर्ज किया गया था।
जमीन का सौदा: एफआईआर के अनुसार, माली परिवार के पास सिन्नर में 16.5 एकड़ कृषि भूमि थी, जिसे वे बेचना चाहते थे। वर्ष 2003 में उनकी मुलाकात अशोक खरात से हुई, जो जमीन की रजिस्ट्री का विधिक काम करता था।
मौत का डर और अंधविश्वास: अभियोजन पक्ष का आरोप है कि अशोक खरात ने परिवार को दिगभ्रमित करने और डराने के लिए दावा किया कि उनकी जमीन पर बने कुएं में किसी ने पूर्व में आत्महत्या की थी। यदि उन्होंने यह जमीन तुरंत नहीं बेची, तो तंत्र-मंत्र के अनुसार शिकायतकर्ता के भाई की अकाल मृत्यु हो सकती है। खरात ने वहां एक मंदिर बनवाने का विधिक आश्वासन भी दिया था।
कथित काला जादू: नवंबर 2003 में अशोक खरात ने जमीन पर कुछ कथित तांत्रिक अनुष्ठान किए। उसने मंत्रोच्चार के बीच लाल कपड़े में लिपटे 4 बर्तन परिवार को दिए और 11 दिनों तक घर में रखने को कहा। इसके बाद फरवरी 2004 में महज ₹1.37 लाख में जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई, जिसका एक हिस्सा अशोक और दूसरा हिस्सा उसकी पत्नी कल्पना के नाम दर्ज हुआ। बाद में कीमत कम होने का विरोध करने पर पीड़ित परिवार को कथित तौर पर ‘काले जादू’ से तबाह करने की विधिक धमकी दी गई।
मुख्य आरोपी अशोक खरात का विधिक स्टेटस
बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कल्पना खरात का अपने पति के इन कथित तांत्रिक दावों या धमकियों से कोई विधिक सरोकार नहीं है, यह विशुद्ध रूप से एक पंजीकृत विधिक अनुबंध (Contract) का मामला है।
गौरतलब है कि स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात की पृष्ठभूमि अत्यधिक आपराधिक रही है। उसके खिलाफ नासिक और अहिल्यानगर (अहमदनगर) जिलों के विभिन्न थानों में यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment), अंधविश्वास विरोधी कानून के उल्लंघन और धोखाधड़ी के कई संगीन विधिक मामले दर्ज हैं। वह वर्तमान में जमानत न मिलने के कारण न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी को अब कोर्ट से विधिक संरक्षण मिल गया है।

