देश-विदेश – परमाणु युद्ध का ख़तरा अमरीका-रूस के मध्य मंडराता, मीख़ाईल गोर्बाचोफ़ (पूर्व सोवियत संघ के आख़िरी नेता) ने रूस-अमरीका के मध्य परमाणु युद्ध के मंडराते ख़तरे को दूर करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पूतिन से बातचीत के ज़रिए आपसी मदभेद को हल करने और परमाणु युद्ध से बचने के लिए परमाणु हथियारों पर ज़्यादा से ज़्यादा रोक लगाने की दिशा में काम करने की अपील की।
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गोर्बाचोफ़ ने यह अपील ऐसी हालत में की है कि अमरीकी बम वर्षक विमान रूसी नौसेना की बेस के ऊपर उड़ान भर रहे थे। उन्होंने रूसी न्यूज़ एजेन्सी इंटरफ़ैक्स को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि दोनों नेताओं को चाहिए कि परमाणु हथियारों पर लगाम लगाने के लिए आपस में मुलाक़ात व विचार विमर्श करें। 89 साल के गोर्बाचोफ़ ने कहाः “मेरी नज़र में राष्ट्रपतियों का मुलाक़ात करना ज़रूरी है। तजुर्बा बताता है कि मुलाक़ात और बातचीत ज़रूरी है।”
उन्होंने आगे कहाः “अस्ल मुद्दा परमाणु जंग से बचना है और इस मुश्किल को अकेले हल नहीं किया जा सकता, बल्कि मुलाक़ात होना ज़रूरी है। अगर निरस्त्रीकरण का लक्ष्य हासिल हो जाए और मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था क़ायम हो जाए, तो बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है।”
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याद रहे कि दोनों पक्षों के बीच, पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के शासन काल में बड़े पैमाने पर साइबर हमले के इल्ज़ाम और परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने तथा सेक्युरिटी से जुड़े मामलों में असहमति की वजह से, तनाव बढ़ गया था।
इस साल के शुरू में गोर्बाचोफ़ ने वॉशिंगटन और मॉस्को दोनों पर बल दिया कि आपसी संबंधों के बेहतर होने के रास्ते में मौजूद खाई को पाटें और संबंधों को बेहतर बनाएं। इसी तरह उन्होंने मौजूदा हालात को बहुत ही चिंताजनक बताया था।
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उन्होंने कहा था कि जैसे ही रूस-अमरीका के बीच न्यू-स्टार्ट संधि की मुद्दत बढ़ेगी, अधिक महत्वकांक्षी संधि के बारे में बातचीत हो सकती है। न्यू-स्टार्ट, दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाली अकेली संधि है।
29 जनवरी को रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पूतिन ने न्यू-स्टार्ट संधि की मुद्दत को बढ़ाने वाले क़ानून पर दस्तख़त किए थे।