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Sunday, June 28, 2026

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केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा डिजिटल खुलासा: गूगल पर ‘डेथ पॉइंट’ और ‘हत्या को हादसा बनाने के तरीके’ खोजती रही मंगेतर सिया; कत्ल की पूरी रिहर्सल का भंडाफोड़

पुणे/लोनावला: पुणे के हाई-प्रोफाइल युवा बिल्डर केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस और खुफिया जांच प्रणालियों के हाथ कुछ ऐसे चौंकाने वाले डिजिटल सबूत लगे हैं, जिसने इस पूरे मामले को देश के सबसे शातिर आपराधिक षड्यंत्रों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। एनडीटीवी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने केतन को रास्ते से हटाने के लिए सर्च इंजन गूगल (Google) को अपना सबसे बड़ा मददगार बनाया था।

वारदात को अंजाम देने से लेकर पुलिस को गुमराह करने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने तक की पूरी स्क्रिप्ट इन दोनों ने पहले ही तैयार कर ली थी, जिसका बकायदा रिहर्सल (पूर्वाभ्यास) भी किया गया था।

1. गूगल हिस्ट्री ने खोला राज: सर्च किया था लोहगढ़ किले का ‘डेथ पॉइंट’

पुलिस की साइबर और फॉरेंसिक विधिक जांच में सिया गोयल के मोबाइल और सर्च लॉग्स से बेहद सनसनीखेज जानकारियां मिली हैं। सिया ने इंटरनेट पर बाकायदा रिसर्च की थी कि कानून की नजरों से बचकर एक सोची-समझी हत्या को ‘एक्सीडेंटल डेथ’ (हादसे में हुई मौत) का रूप कैसे दिया जाए।

सिया गोयल की खौफनाक ‘गूगल सर्च’ लिस्ट:

  • परफेक्ट मर्डर स्पॉट: हत्या को अंजाम देने के लिए कौन सी भौगोलिक जगह सबसे उपयुक्त और सुरक्षित रहेगी?
  • लोहगढ़ का ‘डेथ पॉइंट’: लोहगढ़ किले का सबसे खतरनाक ‘डेथ पॉइंट’ कौन सा है, जहां से गिरने पर बचने की कोई गुंजाइश न रहे।
  • सुनसान इलाके की तलाश: किले की सबसे ऊंची और पूरी तरह से सुनसान जगह कौन सी है, ताकि वारदात के समय कोई चश्मदीद गवाह न मिल सके।

2. पुलिस को गुमराह करने की स्क्रिप्टेड तैयारी; रटे-रटाए जवाबों से खुला राज

जांच अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों ने अत्यधिक ओवर-कॉन्फिडेंस में आकर पुलिस के विधिक शिकंजे से बचने के लिए एक समानांतर योजना (प्लान-बी) भी तैयार कर रखी थी:

  1. सवालों की एडवांस ट्रेनिंग: सिया और चेतन ने पहले ही आपस में यह तय कर लिया था कि यदि पुलिस उन पर शक करती है, तो किस विधिक सवाल का क्या जवाब देना है, किसे टालना है और किसे घुमाना है।
  2. पकड़ा गया झूठ: दोनों ने अपने बयानों को इतनी अच्छी तरह से रट रखा था कि शुरुआती पूछताछ में ही उनके ‘ओवर-परफेक्ट’ और एक जैसे जवाबों ने पुलिस के मन में गहरा विधिक संदेह पैदा कर दिया।
  3. भेष बदलने की तैयारी: यदि बात ज्यादा बिगड़ती, तो दोनों ने कानून की पहुंच से दूर भागने के लिए अपना वेश (Disguise) और विधिक पहचान तक बदलने की पूरी प्लानिंग कर रखी थी।
  4. डिजिटल डेटा डिलीट करना: केतन को खाई में धकेलने के तुरंत बाद, दोनों ने अपने मोबाइल फोन से सभी व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और सर्च हिस्ट्री को विधिक रूप से नष्ट करने की पूरी कोशिश की, ताकि तकनीकी साक्ष्य न मिल सकें। हालांकि, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने डेटा को रिकवर कर लिया है।

दोनों आरोपियों को लगा कि अपनी व्यक्तिगत और विधिक उलझनों को सुलझाने का सबसे आसान तरीका केतन अग्रवाल को हमेशा के लिए रास्ते से हटा देना ही है। पुलिस अब इन सभी डिजिटल साक्ष्यों, रिकवर की गई गूगल सर्च हिस्ट्री और फॉरेंसिक डेटा को विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के विधिक मार्गदर्शन में कोर्ट के समक्ष मजबूत चार्जशीट के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है।

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