नई दिल्ली: देश के संसदीय और विधिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। संसद का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र (Monsoon Session) आगामी 20 जुलाई 2026 से प्रारंभ हो सकता है। आधिकारिक विधिक व प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस सत्र के लगभग तीन सप्ताह तक चलने की प्रबल संभावना है। हालांकि, तारीखों और कार्यसूची को लेकर संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCPA) द्वारा अंतिम विधिक निर्णय लिया जाना अभी बाकी है।
आमतौर पर संसद के मानसून और शीतकालीन सत्र चार सप्ताह के होते हैं जिनमें औसतन 20 बैठकें विधिक रूप से निर्धारित होती हैं, लेकिन विधायी प्राथमिकताओं को देखते हुए पहले भी कम अवधि के सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। हालिया विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम और पुदुचेरी में सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) की जीत के बाद यह पहला बड़ा विधायी सत्र होने जा रहा है, जिससे सदन के भीतर राजनीतिक और विधिक समीकरण काफी बदले नजर आएंगे।
1. दो बड़े राजनीतिक दलों में विधिक बगावत; स्पीकर के फैसले पर टिकी निगाहें
आगामी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा के भीतर दलीय संप्रभुता और दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से जुड़े कई विधिक पेच देखने को मिलेंगे:
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) संकट: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष टीएमसी के 20 बागी सांसदों को एक अलग विधिक समूह के रूप में मान्यता देने की महत्वपूर्ण याचिका लंबित है।
- शिवसेना (UBT) विभाजन: इसी प्रकार, शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों ने भी सदन में अपने अलग विधिक अस्तित्व और समूह को मान्यता देने की गुहार लगाई है।
- समीकरणों में बदलाव: राज्यसभा में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित माननीय सांसदों के विधिक शपथ ग्रहण के बाद उच्च सदन (Upper House) में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति विधिक व संख्यात्मक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत और सुदृढ़ हो चुकी है।
2. महिलाओं के लिए 2029 आरक्षण और लोकसभा सीटों में 50% वृद्धि का नया विधिक मसौदा
संसद का पिछला सत्र सरकार के विधायी एजेंडे के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रहा था, क्योंकि सदन में वह महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) पारित नहीं हो सका था जिसके जरिए वर्ष 2029 से देश के सभी विधानमंडलों और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की कुल विधिक सीटों की संख्या बढ़ाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव शामिल था।
विधेयक के नए विधिक मसौदे (Draft) की मुख्य विशेषताएं:
- सीटों में समान बढ़ोतरी: पुराने गतिरोध को दूर करने के लिए केंद्र सरकार अब इस विधेयक का एक नया और संशोधित विधिक मसौदा तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की वर्तमान लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने के विधिक फॉर्मूले पर विचार किया जा रहा है।
- दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता का निवारण: केवल जनसंख्या (Population) के विधिक आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का मुद्दा लंबे समय से दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों (जैसे द्रमुक, अन्नाद्रमुक आदि) की प्रमुख चिंताओं में शामिल रहा है, क्योंकि उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों के मामले में विधिक नुकसान नहीं होना चाहिए। समानुपातिक 50% की विधिक वृद्धि से इस क्षेत्रीय असंतुलन को संतुलित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस नए विधायी संशोधनों और बागी गुटों की विधिक मान्यताओं के कारण आगामी मानसून सत्र के अत्यंत हंगामेदार और ऐतिहासिक विधिक बहसों का गवाह बनने की पूरी उम्मीद है।

