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Saturday, July 4, 2026

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ऊर्जा क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक छलांग: पीएम मोदी ने पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित की; जानिए क्यों है यह सबसे हाईटेक

बालोतरा (राजस्थान): भारत के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल इतिहास में 4 जुलाई 2026 का दिन एक युगांतकारी मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को आधिकारिक विधिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया है।

यह मेगा प्रोजेक्ट हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है। 79,450 करोड़ रुपये से अधिक की विशाल विधिक निवेश लागत से तैयार यह कॉम्प्लेक्स देश की 24वीं रिफाइनरी है, जो भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

1. क्या होती है ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और क्या है इसकी विधा?

  • शून्य से निर्माण: ‘ग्रीनफील्ड रिफाइनरी’ वह होती है जिसे किसी मौजूदा ढांचे में विस्तार करने के बजाय, पूरी तरह से एक नई जगह पर बिल्कुल शुरू से (Scratch) योजनाबद्ध तरीके से बनाया जाता है। पचपदरा की इस परियोजना का विधिक निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था, जो अब पूर्ण रूप से व्यावसायिक उत्पादन (Commercial Production) के लिए तैयार है।
  • इंटीग्रेटेड मॉडल: यह भारत की पहली ऐसी ग्रीनफील्ड परियोजना है, जिसमें कच्चे तेल को साफ करने (Refining) और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण की विधा को एक साथ जोड़ा गया है।

2. वैश्विक मानकों पर देश की सबसे हाईटेक रिफाइनरी

पचपदरा रिफाइनरी को अपनी अनूठी तकनीकी विशिष्टताओं के कारण भारत की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का विधिक गौरव प्राप्त है:

नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) और यील्ड का मतलब: NCI किसी रिफाइनरी की तकनीकी आधुनिकता को मापने का विधिक पैमाना है। इंडेक्स जितना ऊंचा होगा, रिफाइनरी उतने ही जटिल और भारी कच्चे तेल को कुशलता से साफ कर सकेगी। वहीं, 26% पेट्रोकेमिकल यील्ड का मतलब है कि प्रोसेस किए गए कुल कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा सीधे पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिमर और अन्य रसायनों जैसे मूल्यवान उत्पादों में बदला जाएगा।

3. पचपदरा कॉम्प्लेक्स की प्रमुख विधिक व भौतिक विशेषताएं

  • विशाल भूभाग: यह रिफाइनरी लगभग 4,400 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली है, जिसका बाहरी सुरक्षा परिसर करीब 32 किलोमीटर लंबा है।
  • प्रोसेसिंग यूनिट्स: परिसर में कुल 13 प्रसंस्करण इकाइयां (Processing Units) स्थापित की गई हैं, जिनमें 9 रिफाइनरी और 4 पेट्रोकेमिकल इकाइयां शामिल हैं।
  • क्रूड मिक्सिंग विधा: इसे विशेष रूप से 27 API ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह ‘अरब मिक्स’ सहित दुनिया के अलग-अलग ग्रेड के कच्चे तेल को अपनी जरूरत के अनुसार मिलाकर (Blend) रिफाइन कर सकती है।
  • अग्निशमन सुरक्षा: औद्योगिक सुरक्षा के विधिक नियमों के तहत परिसर के भीतर ही तीन समर्पित फायर स्टेशन बनाए गए हैं।

4. लॉजिस्टिक्स ग्रिड: कहां से आएगा कच्चा तेल और कहां जाएगा तैयार ईंधन?

[राजस्थान (मंगला टर्मिनल): 15 लाख टन] ──┐
                                        ├──► [पचपदरा रिफाइनरी] ──► (पाइपलाइन) ──► [पालनपुर (गुजरात)] ──► [देशव्यापी वितरण]
[गुजरात (मुंद्रा पोर्ट आयात): 75 लाख टन] ─┘

कच्चे तेल की आपूर्ति (Inflow):

रिफाइनरी को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर साल 90 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की आवश्यकता होगी:

  1. घरेलू आपूर्ति: करीब 15 लाख टन कच्चा तेल राजस्थान के स्थानीय मंगला टर्मिनल से विधिक रूप से सप्लाई किया जाएगा।
  2. आयातित आपूर्ति: शेष 75 लाख टन कच्चा तेल गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के जरिए विदेशों से आयात किया जाएगा। मुंद्रा से पचपदरा रिफाइनरी तक इस क्रूड ऑयल को पहुंचाने के लिए एक समर्पित अंडरग्राउंड पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है।

तैयार ईंधन का निकास (Outflow):

रिफाइनरी में कड़े विधिक मानकों के तहत उत्पादित होने वाला उच्च गुणवत्ता वाला पेट्रोल और डीजल एचपीसीएल (HPCL) की नई पाइपलाइन के माध्यम से गुजरात के पालनपुर भेजा जाएगा। पालनपुर के मुख्य ग्रिड हब से इसे देश के विभिन्न हिस्सों और घरेलू बाजारों में वितरण के लिए भेजा जाएगा। इस परियोजना से राजस्थान में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के लाखों विधिक अवसर सृजित हो रहे हैं।

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